हिन्दुवादी नेता ने कहा कि घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस मामले में अब तक जिम्मेदार पुलिसकर्मी पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उनका कहना है कि अगर इस मामले की सही जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच जाती, तो अब तक संबंधित पुलिसकर्मी पर सख्त कदम उठाया जा चुका होता।
अरुण पाठक ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने या हल्का दिखाने की कोशिश की जा रही है, जिससे पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिल पा रहा है। कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त मानी जाती है, लेकिन इस घटना में कार्रवाई में हो रही देरी कई सवाल खड़े कर रही है। उनका कहना है कि यदि किसी अन्य वर्ग या समुदाय के साथ इस तरह की घटना होती, तो तत्काल कार्रवाई देखने को मिलती। ऐसे में यह दोहरे मापदंड जैसा प्रतीत हो रहा है।
हिन्दुवादी नेता का यह भी कहना है कि पुलिस का काम समाज की रक्षा करना है, न कि किसी की धार्मिक पहचान का अपमान करना। शिखा उखाड़ने जैसी घटना न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि पूरे समाज को ठेस पहुंचाने वाली है। अब सभी की निगाहें प्रदेश सरकार पर टिकी हैं कि वह इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है और दोषियों के खिलाफ कब तक कड़ी कार्रवाई करती है।