पाया राज्य अध्यापक का पुरस्कार
प्राथमिक विद्यालय भिटारी में प्रधानाध्यापक व राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित रविन्द्र कुमार सिंह कहते हैं कि पहले के समय में अंग्रेजी का ज्यादा चलन नहीं हुआ करता था। तब यही भाषा भारतवासियों व भारत से बाहर रह रहे हर वर्ग के लिए सम्माननीय होती थी। आज अंग्रेजी ने देश में अपने पांव गड़ा लिए है, लेकिन हिंदी ने अब धीरे-धीरे हर क्षेत्र में अंग्रेजी को कड़ी टक्कर देना शुरू कर दिया है। हिंदी अनुवाद की नहीं बल्कि संवाद की भाषा है। किसी भी भाषा की तरह हिंदी भी मौलिक सोच की भाषा है।
बच्चों को बताना होगा हिंदी का महत्व
आर्य महिला पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ झुमुरसेन गुप्ता कहती हैं कि आज हर माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल में प्रवेश दिलाते हैं। इन स्कूलों में विदेशी भाषाओं पर तो बहुत ध्यान दिया जाता है। लेकिन हिंदी की तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता।
लोगों को लगता है कि रोजगार के लिए इसमें कोई ऐसा खास मौका नहीं मिलेगा। लेकिन हमें इस सोच को बदलने की जरूरत है और अपने बच्चों को हिंदी का सम्मान करना सीखना होगा, तभी हम हिंदी को और सम्मान दिला पाएंगे।
भारत की पहचान है हिंदी
बीएचयू में एसिस्टेंट प्रोफेसर डॉ राजकुमार शर्मा कहते हैं एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है। बल्कि हमारे जीवन मूल्यों संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है। हिंदी सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की संभवत: सबसे वैज्ञानिक भाषा है।
देश की स्वतंत्रता से लेकर हिंदी में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की है। हिंदी के माध्यम से हम बेहतर जन सुविधाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। भारतीय विचार और संस्कृति का वाहक होने का श्रेय हिंदी को ही जाता है।