नमो घाट पर 25 मई की भोर में सोनभद्र के पर्यटक राजेश उर्फ चिंटू की हत्या के बाद घाट संचालन का जिम्मा संभालने वाली कंपनी स्थानीय वेंडरों से शपथ पत्र भरवा रही है। रेस्टोरेंट, झूला, दुकान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले वेंडरों से यह शपथ पत्र भरवाया जा रहा है।
कंपनी की ओर से वेंडरों को दिए जा रहे शपथ पत्र में प्रमुख रूप से यह घोषणा कराई जा रही है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। वे किसी भी प्रकार की मारपीट या अभद्रता में शामिल नहीं होंगे तथा नमो घाट प्रबंधन और वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा जारी नियमों का पालन करेंगे। साथ ही भविष्य में किसी भी अनुशासनहीनता या नियम उल्लंघन की स्थिति में उसकी जिम्मेदारी स्वयं की होने की बात भी शपथ पत्र में शामिल है।
वेंडरों का कहना है कि पर्यटक की मौत के मामले के बाद प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी तय करने के बजाय व्यवसायियों पर अतिरिक्त शर्तें थोप रहा है।रॉबर्ट्स ग्रुप को नमो घाट के संचालन का टेंडर मिलने के बाद घाट को विभिन्न हिस्सों में विभाजित कर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कराई गई थीं। इसके एवज में वेंडरों से हर महीने 20 हजार से 50 हजार रुपये तक किराया और जीएसटी वसूला जाता है। इसके अलावा कॅमर्शियल बिजली कनेक्शन के नाम पर अलग से प्रति यूनिट 17 रुपये शुल्क भी लिया जाता है।