गर्मी से परेशान होकर अस्पताल पहुंचने वालों में महाराष्ट्र,बिहार, तमिलनाडू, कनार्टक सहित दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालु ज्यादा है। 108 एंबुलेंस के जिला प्रभारी विकास तिवारी का कहना है कि विश्वनाथ धाम के गेट नंबर चार के पास एक और दशाश्वमेध घाट के पास एक एंबुलेंस पिछले महीने से ही खड़ी रहती है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बेहोश होने, चक्कर आने आदि समस्या पर मंडलीय असपताल लेेकर जाया जाता है। इस महीने में 16 दिन में करीब 50 श्रद्धालु और इतने ही घाटों से लोगों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया।
डॉक्टर बोले
अस्पताल की ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी में पिछले 15 दिन में मरीजों की संख्या बढ़ी हैै। काशी विश्वनाथ धाम, गंगा घाट सहित अन्य जगहों से भी पांच से छह मरीज हर दिन आ रहे हैं। प्राथमिक उपचार के बाद चार से पांच घंटे में जब राहत मिल जाती है तो उन्हें डॉक्टर की सलाह पर घर भेज दिया जाता है। - डॉ. एसपी सिंह, एसआईसी मंडलीय अस्पताल
काशी विश्वनाथ धाम में मुकम्मल व्यवस्था न होने से भी श्रद्धालु परेशान हैं। कहीं मैट न होने की वजह से पांव जल रहे हैं तो कई जगहों पर छांव भी नहीं है। कॉरिडोर परिसर के गंगा द्वार की सीढ़ियों पर मैट न होने से श्रद्धालुओं को काफी दिक्कत होती है। तपते फर्श से बचने के लिए सीढि़यों पर श्रद्धालुओं को दौड़कर चढ़ना-उतरना पड़ता है। वहीं, गर्भगृह के पास पहुंचने वाले मार्ग पर भी मैट व छांव की व्यवस्था नहीं है। रविवार को सुल्तानपुर से श्री काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन करने आया परिवार गंगा द्वार से तपते फर्श से होकर गुजरा। उन्होंने बताया कि सीढियों पर मैट और छांव की व्यवस्था होनी चाहिए। गंगा द्वार से मंदिर चौक, गेट नंबर 4 के बगल से नंदू फारिया गली में भी शेड नहीं होने से श्रद्धालु धूप में ही खड़े रहते हैं। मंदिर के एसडीएम शंभू शरण ने कहा कि जिन इलाकों में धूप से बचाव की व्यवस्था नहीं है, वहां भी छांव के लिए शेड व्यवस्था की जा रही है।
गर्मी का कहर बढ़ता जा रहा है। अस्पतालों की इमरजेंसी में बीमारों की लाइन लगी हुई है। कई का प्राथमिक उपचार कर उन्हें घर भेज दिया गया तो 60 लोगों को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। इस बीच रविवार को गर्मी के कारण 17 लोगों की मौत हो गई। इसमें मंडलीय अस्पताल में सर्वाधिक नौ, दीनदयाल अस्पताल में चार, रामनगर में दो, चौकाघाट पर एक और बनारस रेलवे स्टेशन पर एक यात्री ने अचानक बैठे बैठे दम तोड़ दिया। मरने वालों की मौत का सही कारण पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा। हालांकि परिजनों का कहना है कि गर्मी की वजह से तबियत बिगड़ने पर वे उन्हें अस्पताल लेकर आए थे।
रविवार को सुबह से लेकर रात तक गर्मी से परेशान होकर मंडलीय अस्पताल में 130 लोग पहुंचे। इसमें 30 को भर्ती किया गया। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में आने वालों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया। यहां 20 लोगों को भर्ती किया। इसके अलावा करीब 100 मरीज बीएचयू समेत अन्य अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए पहुंचे। इनमें उल्टी-दस्त के साथ ही बेचैनी, सिरदर्द, चक्कर आनेे, बुखार की समस्या थी। यहां 30 से अधिक लोगों को भर्ती किया गया।
मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसपी सिंह के अनुसार रविवार को इमरजेंसी में जिन 9 लोगों की मौत हुई हैं, उसमें चार लावारिस जबकि पांच ने अस्पताल के गेट पर पहुंचते ही दम तोड़ दिया। उन्हें इमरजेंसी में मृत घोषित किया गया। उधर जिला अस्पताल में मरने वाले चार लोगों में चौबेपुर निवासी धन्नू (45), सारनाथ निवासी शिवमूरत यादव (75) और गाजीपुर निवासी सर्वजीत (75) के साथ ही एक अज्ञात मरीज शामिल था।
उधर, कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार की शाम अचानक एक यात्री की मौत हो गई। प्लेटफार्म संख्या दो पर काफी देर तक उसका शव पड़ा रहा। एक यात्री प्रगति ने एक्स पर शिकायत दर्ज कराई और आरपीएफ व जीआरपी ने शव को कब्जे में लिया। उसने अपनी शिकायत में बताया कि एक घंटे से वह व्यक्ति छटपटा रहा था। सांस लेने की कोशिश कर रहा था। मगर, चिकित्सक को भी नहीं बुलाया गया। यदि समय रहते कोई आया होता तो शायद जान बच सकती थी। जीआरपी प्रभारी निरीक्षक हेमंत सिंह ने बताया कि यात्री को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शिनाख्त का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा कोई वस्तु या पेपर नहीं मिला कि उसकी पहचान हो सके। शव को मोर्चरी में रखवाया गया है।