तमिलनाडु की तर्ज पर आईसीएमआर ने कार्डियक अरेस्ट से होने वाली मौत के आंकड़ों को कम करने के लिए यह पहल की है। इसके लिए वाराणसी जिले में दीनदयाल, कबीरचौरा और एलबीएस रामनगर में थांब्रोलिसिस के इंजेक्शन रखे गए हैं।
चेस्ट पेन के आठ घंटे के अंदर शहर के सरकारी अस्पतालों में अगर मरीज पहुंच जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। तमिलनाडु की तर्ज पर आईसीएमआर ने कार्डियक अरेस्ट से होने वाली मौत के आंकड़ों को कम करने के लिए यह पहल की है। इसके तहत जिला, मंडलीय और स्वास्थ्य केंद्रों पर थांब्रोलिसिस के इंजेक्शन रखवाए गए हैं।
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राजकीय चिकित्साधिकारी डॉ. शिवशक्ति द्विवेदी ने बताया कि सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी की पहल पर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत बनारस में हुई है। इसके तहत मंडलीय अस्पताल, जिला चिकित्सालय, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल रामनगर, सीएचसी और पीएचसी पर थांब्रोलिसिस का इंजेक्शन रखवाया गया है। प्राइवेट अस्पतालों में इस इंजेक्शन की कीमत लगभग 50 हजार रुपये है।
चेस्ट पेन के आठ घंटे के अंदर मरीज अगर अस्पताल पहुंच जाता है और उसे यह इंजेक्शन लग जाए तो उसकी जान बच सकती है। इंजेक्शन लगने के बाद उसे हार्ट अटैक से काफी हद तक बचाया जा सकता है। सभी अस्पतालों में इंजेक्शन के दो-दो बाक्स दिए गए हैं। वहीं आईसीएमआर की ओर से कार्डियक अरेस्ट की घटनाओं को रोकने के लिए चिकित्सकों को सीपीआर का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए निरंतर अभियान चल रहा है।
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बीएचयू हृदय विभाग में दिया सीपीआर का प्रशिक्षण
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हृदय विभाग में सीपीआर का प्रशिक्षण दिया गया। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से सीपीआर पर डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने राजकीय चिकित्सकों एवं मेडिकल टीम को प्रशिक्षित किया। उन्होंने बताया कि सीपीआर से सहय रहते हार्ट अटैक से पीड़ित लोगों की जान बचाई जा सकती है। सीपीआर उस व्यक्ति के लिए जीवनरक्षक तकनीक है, जिसकी सांस या दिल की धड़कन अचानक बंद हो जाती है। इस दौरान हृदय विभाग के प्रो. धर्मेंद्र जैन, डॉ. पायल सिंह, डॉ. रोहित सोनी, डॉ. अजीत सिंह मौजूद थे।