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ज्ञानवापी के दोनों मामलों की सुनवाई टली: अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर 11 और निगरानी मामले पर 14 नवंबर की तारीख

Thu, 03 Nov 2022 03:20 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

सिविल जज सीनियर डिवीजन कुमुदलता त्रिपाठी के अवकाश पर रहने के कारण सुनवाई अब 11 नवंबर को होगी। वहीं, निगरानी मामले में अंजुमन के अधिवक्ता मुमताज अहमद के बीमार होने के कारण सुनवाई टल गई। 
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Gyanvapi Masjid Case - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में गुरुवार को ज्ञानवापी प्रकरण सुनवाई  के क्षेत्राधिकार को लेकर दाखिल निगरानी याचिका पर सुनवाई टल गई। अदालत में मुस्लिम पक्ष की तरफ से एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि अधिवक्ता मुमताज अहमद बीमार हैं, ऐसे में सुनवाई के लिए कोई अन्य तिथि देने की गुहार लगाई गई । कोर्ट ने इस पर सुनवाई के लिए 14 नवंबर की तिथि नियत कर दी।

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प्रकरण के अनुसार निगरानी कर्ता अंजुमन इंतजामिया की ओर से जुलाई 2021 में निगरानी याचिका दाखिल की गई थी। कहा गया था कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। ऐसे मेें ज्ञानवापी मामले से जुड़े वाद की सुनवाई का अधिकार लखनऊ वक्फ बोर्ड को है, सिविल न्यायालय को नहीं।

इसके बावजूद अवर न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज करते हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई जारी रखी और प्रतिवादी के क्षेत्राधिकार के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था। इसके बाद अंजुमन इंतजामिया ने लोवर कोर्ट के आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की है।

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ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग के राग भोग पर सुनवाई 11 को

हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है। - फोटो : सोशल मीडिया।
सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल वाद की सुनवाई बृहस्पवितार को टल गई। इसमें ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा-पाठ रागभोग आरती करने की अनुमति मांगी गई है। कोर्ट के पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो पाई। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 11 नवंबर की तिथि नियत की गई है।   
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी, रमेश उपाध्याय, चंद्रशेखर सेठ के माध्यम से अदालत में वाद दाखिल किया है, जिसमें शृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुए कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का विधिवत रागभोग, पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से विधिवत करना चाहिए था, लेकिन अभी तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया है।

न किसी अन्य सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को इसके लिए नियुक्त किया। उन्होंने बताया कि कानूनन देवता की परिस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है। जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है। 
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