हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है।
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सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल वाद की सुनवाई बृहस्पवितार को टल गई। इसमें ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा-पाठ रागभोग आरती करने की अनुमति मांगी गई है। कोर्ट के पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो पाई। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 11 नवंबर की तिथि नियत की गई है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी, रमेश उपाध्याय, चंद्रशेखर सेठ के माध्यम से अदालत में वाद दाखिल किया है, जिसमें शृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुए कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का विधिवत रागभोग, पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से विधिवत करना चाहिए था, लेकिन अभी तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया है।
न किसी अन्य सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को इसके लिए नियुक्त किया। उन्होंने बताया कि कानूनन देवता की परिस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है। जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है।