इस पर निगरानीकर्ता अंजुमन इंतजामिया की ओर से आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया था, जिस पर पिछली तिथि को अदालत में अंजुमन की ओर से आपत्ति दाखिल की गई थी। आपत्ति में कहा गया है कि यह मुकदमा दूसरा है। ऐसे में श्रृंगार गौरी मामले के आदेश को साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
प्रकरण के अनुसार अंजुमन की ओर से जुलाई 2021 में निगरानी याचिका दाखिल की गई थी। कहा गया था कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उसकी सुनवाई का अधिकार लखनऊ वक्फ बोर्ड को है, सिविल न्यायालय को नहीं। इसके बावजूद अवर न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज करते हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई जारी रखी और क्षेत्राधिकार के चुनौती संबंधी प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था। जिसके बाद अंजुमन इंतजामिया ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की थी।