ज्ञानवापी के सबसे पुराने मामले में पांच अक्तूबर को आदेश आ सकता है। मुकदमे के वादी रहे दिवंगत हरिहर पांडेय की बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेणु पांडेय की ओर से अधिवक्ता ने विरोध दर्ज कराया।
विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत में मंगलवार को ज्ञानवापी के सबसे पुराने मामले में सुनवाई हुई। नए मंदिर के निर्माण, हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने और वादमित्र को हटाने से संबंधित वर्ष 1991 के मुकदमे में वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की तरफ से दस्तावेज दाखिल किए गए। साथ ही उन्हें पत्रावली पर लेने का अनुरोध किया गया। इसका वादियों के अधिवक्ता ने विरोध किया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने प्रार्थना पत्र पर आदेश के लिए पांच अक्तूबर की तिथि तय की है।
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सबसे पुराने मुकदमे के वादी रहे दिवंगत हरिहर पांडेय की बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेणु पांडेय की ओर से अधिवक्ता ने विरोध दर्ज कराया। अधिवक्ता ने कहा कि दाखिल दस्तावेज फोटोस्टेट हैं। इनका कोई विधिक महत्व नहीं है। मुकदमे की सुनवाई के लिए मूल पत्रावली अदालत में उपलब्ध है।
तीनों बेटियों ने 6 अप्रैल 2024 को पिता के स्थान पर मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। 31 मई 2025 को वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को पद से हटाने की मांग करते हुए अलग से प्रार्थना पत्र दिया गया। सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) भावना भारतीय की अदालत ने 11 जुलाई 2025 को वादमित्र को हटाने संबंधी प्रार्थना पत्र को पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ तीनों बहनों ने अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है।