दिल्ली से वाराणसी पहुंचे वायु प्रदूषण से दूसरे दिन मंगलवार को भी निजात नहीं मिल सकी। 30 घंटे से ज्यादा समय से प्रदूषण की स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है। मंगलवार को वाराणसी में पूरे दिन आसमान में धुंध छाई रही। आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायतें लेकर सैकड़ों लोग डॉक्टरों के पास पहुंचे। वैज्ञानिकों का कहना है कि करीब 48 घंटे तक प्रदूषण की चादर ऐसी ही तनी रहेगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक शाम पांच बजे पीएम-2.5 वाराणसी में 401, पीएम-10 368 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। इससे पहले सुबह 10 बजे हालात और बदतर थे। धूप के कारण शाम को प्रदूषण थोड़ा कम हुआ।
जागरुक व्यापारी संगठन की ओर से सड़क, गंदगी, प्रदूषण, इनसे होने वाले दुष्प्रभाव और गंभीर समस्या पर प्रशासनिक, राजनीति उदासीनता विषय पर मंगलवार को चर्चा हुई। सदस्यों ने मलदहिया दास मार्केट में एक बैठक कर इस विषय पर चिंता प्रकट की। इस मामले में मुहिम चलाने का निर्णय लिया गया है। व्यापारी नेता प्रेम मिश्रा और अजय गुप्ता ने कहा कि इस जंग में हमें काशी का नागरिक बन के युद्ध करना होगा। वाराणसी गैस वितरक संघ के प्रवक्ता मनीष चौबे ने कहा कि गंदगी और धूल के गुबार ने पूरी काशी को घेर रखा है। टूरिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता, वरुणा क्षेत्र व्यापार मंडल के महामंत्री शोमनाथ विश्वकर्मा ने लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया। बैठक में प्रमुख रूप से एम अंसारी, चंदन विश्वकर्मा, राज किशोर गुप्ता, राजू गुप्ता, मनीष गुप्ता उपस्थित रहे।
पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो. एएस रघुवंशी ने बताया कि वातावरण में प्रदूषण है। ठंड आने से वायुमंडल में जल वाष्प भी मौजूद है। जो हवाएं ऊपर जाकर डिफ्यूज हो जानी चाहिए थीं, वो हो नहीं रहीं। इस वजह से धुंध दिखाई दे रही है। इधर बीच बारिश भी नहीं हुई जिससे ये हवा डिफ्यूज हो जाया करती थी। प्रो. रघुवंशी का कहना है कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या, फैक्ट्रियों व कारखानों से निकलने वाले धुंओं का ही ये असर है। इसे एशियन ब्राउन हेज कहते हैं। मौसम विज्ञानी प्रो. एसएन पांडेय ने बताया कि इस बार ठंड अच्छी खासी पड़ेगी और यह लंबी चलेगी।
उध्ार, घने कोहरे से छाई धुंध ने सांस के मरीजोें की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोमवार दोपहर बाद से शुरू धुंध मंगलवार को भी शहर के कई इलाकों में दिखी। उधर, दीनदयाल और मंडलीय अस्पताल की ओपीडी में सांस और आंखों में जलन से परेशान लोगों की संख्या बढ़ गई है। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा के चेस्ट फिजीशियन डॉ. आरके शर्मा के मुताबिक हर साल दिवाली पर आतिशबाजी के बाद कम से कम एक सप्ताह तक पटाखों से निकलने वाले धुएं से पर्यावरण प्रदूषित रहता है। इस दौरानदमा, फेफड़े संबंधी बीमारी के मरीजों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है। दो दिन से इस बीमारी के मरीजों की संख्या दस से बीस प्रतिशत बढ़ी है, ऐसे मरीजों को घर से निकलते समय मॉस्क लगाने, तुरंत अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है। मंगलवार को ओपीडी में सामान्य मरीजों की तुलना में करीब बीस से अधिक मरीज सांस, दमा और एलर्जी के आए। कुछ को सुबह न टहलने, जांच कराते रहने की सलाह दी गई। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग टंडन ने बताया कि मंगलवार को ओपीडी में आए मरीजों को इसके लिए दवा देने के साथ ही सावधानी बरतने को कहा गया। उधर, श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके पाठक ने बताया कि दीवाली के बाद से ओपीडी में 60-70 प्रतिशत मरीज बढ़े हैं। दो-तीन घंटे खुली हवा में रहने पर फेफड़े की कार्यक्षमता 20-25 प्रतिशत तक कम हो जा रही है।