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आंखों में आंसू, होंठों पर दुआएं लिए शुरू हुआ सफर-ए-काबा

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वाराणसी। शहर ए काजी की दुआओं के साथ काशी से काबा के मुकद्दस सफर का आगाज हो गया। कई धर्माचार्यों ने हज जायरीन से मुलाकात की और सफर में सलामती की दुआ की। कोई बाप बेटे से जुदा हो रहा था तो कोई अपनी मां से। कोई भाई से तो कोई बहन से। हर किसी की आंखों में आंसू थे और होठों पर दुआएं। गम और खुशी के मिलेजुले माहौल में दुआओं की तलबगारी के साथ अपनों ने अपनो को माला पहनाकर विदा किया।
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सोमवार को सांस्कृतिक संकुल स्थित अस्थायी हज हाउस आजमीने हज से गुलजार रहा। 160 जायरीन लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट से एयर इंडिया की फ्लाइट से 11:20 बजे जेद्दाह के लिए रवाना हुए। हज यात्रियों की बस छूटने से पूर्व काजी ए शहर मौलाना गुलाम यासीन ने हज जायरीन की सलामती और खुशहाली की दुआ की। इसके बाद मैत्री भवन के निदेशक डॉ. चंद्रकांत, गुरुद्वारा नीचीबाग के ग्रंथी धर्मवीर सिंह, काजी ए शहर, सेंट्रल हज कमेटी सदस्य डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद, एडीएम प्रोटोकाल अतुल कुमार ने बस को हरी झंडी दिखाकर बाबतपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना किया। इस दौरान मौलाना साकिबुल कादरी, मौलाना रेयाज कादरी, मो. अब्बास, मो. जिशान, अदनान खां, हाजी तारिक हसन बबलू, नेयाज अहमद, हाजी जलीस, हाजी वसीम, कारी हाजी मो. मुश्ताक आदि मौजूद रहे।
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