गंगा घाटों की सफाई करता कर्मचारी।
गंगा घाटों पर सिल्ट अभी एक बड़ी चुनौती बनी ही थी कि अब छठ पर्व के बाद निकली पूजन सामग्रियों से मंगलवार को कई घाट बेजार नजर आए। वहीं नगर निगम और घाट से जुड़ी संस्थाएं अब भी निद्रावस्था में हैं। इस बाबत नगर निगम के नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताम शाही ने बताया कि घाटों की सफाई के लिए 66 पंप लगाए गए हैं। 11 नवंबर तक घाटों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
देव दीपावली सिर पर है और गंगा के घाटों की सफाई का काम धीमी रफ्तार से चल रहा है। ऐसे हालात रहे तो देव दीपावली के दिन तक भी घाटों की चमक वापस नहीं आ पाएगी। प्रशासनिक अमले से ज्यादा स्थानीय लोग सफाई के प्रति सजग नजर आ रहे हैं और उनमें नगर निगम के प्रति रोष भी है। छठ के बाद घाटों किनारे फूल, माला सहित अन्य पूजन सामग्रियों का ढेर लगा है। गंगा के कई प्रमुख घाटों की सीढ़ियां अभी भी सिल्ट में छिपी हैं। संतरविदास घाट से लेकर अस्सीघाट, शिवाला घाट, चेतसिंह घाट, राजघाट, रानीघाट, मीराघाट पर गंदगी के साथ सिल्ट जमी है। नगर निगम की सुस्त चाल से देवदीपावली तक सभी 84 घाटों, प्रमुख सरोवराें की सफाई मुश्किल है।
घाटों की सफाई के नाम पर नगर निगम से लेकर स्वयंसेवी संगठनों तक के लोग अभी तक जागे नहीं हैं। जिस गति से सफाई होनी चाहिए, अभी तक उस तरह काम शुरू नहीं हो सका है। नगवा से सामने घाट, विश्वसुंदरी पुल तक घाटों पर पड़ी सिल्ट दीपोत्सव पर असर डाल सकती है। ऐसे में सवाल खड़ा होने लगा है कि यही हाल रहा तो कहां रंगोली बनेगी और दीप कहां जलाए जाएंगे।