वाराणसी के पहड़िया क्षेत्र की अशोक विहार कॉलोनी फेज-2 में रविवार रात दावत खाने गए पूर्व डीआईजी के बिल्डर बेटे बलवंत सिंह (42) की गोली मार हत्या कर दी गई। मौके पर मौजूद लोगों ने दावत से सबसे पहले निकले एक पार्टनर पर ही हत्या का शक जताया है।
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सूचना पाकर पुलिस पहुंची और जिनके घर पर दावत थी, उनसे वारदात के संबंध में पूछताछ की। उधर, बलवंत को लेकर अस्पताल पहुंचे लोगों ने हंगामा किया। छह थानों से पुलिस के अलावा पीएसी स्थिति नियंत्रित करने के लिए बुलाई गई।
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शिवपुर थाना के तरना निवासी बलवंत सिंह अशोक विहार कॉलोनी फेज-2 निवासी पार्टनर रामगोपाल सिंह के घर दावत में शामिल होने गए थे। दावत में बलवंत और उनके चार अन्य पार्टनर शामिल थे। रामगोपाल सिंह के अनुसार खाना खाने के बाद उनका एक पार्टनर सबसे पहले घर से बाहर निकला।
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उसके थोड़ी ही देर बाद बलवंत निकले तो गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बाहर बलवंत जमीन पर गिरे थे और उनके पेट से खून बह रहा था। मौके पर मौजूद स्कार्पियो सवार लोग उन्हें लेकर मलदहिया स्थित निजी अस्पताल गए। वहां डॉक्टरों द्वारा बलवंत को मृत घोषित किए जाने के बाद लोग आपस में ही नोकझोंक और हंगामा करने लगे।
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लोगों का कहना था कि शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे और जिसने गोली मारी है उसका भी यही हश्र करेंगे। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि घटनास्थल के आसपास लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। बलवंत के जिस पार्टनर पर हत्या की आशंका जताई जा रही है उसकी तलाश में क्राइम ब्रांच सहित पुलिस की तीन टीमें लगाई गई हैं। मूल रूप से बड़ागांव थाना के अकोढ़ा गांव के रहने वाले बलवंत सेवानिवृत्त डीआईजी सभाजीत सिंह के बेटे थे। मौके से मिले खोखे के आधार फोरेंसिक टीम ने स्पष्ट किया है कि घटना में .32 बोर की देसी पिस्टल प्रयोग की गई।
बुलेटप्रूफ गाड़ी भी नहीं बचा पाई जान
अस्पताल में परिजनों ने बताया कि बलवंत बुलेटप्रूफ स्कार्पियो से चलते थे। दो बच्चों के पिता बलवंत अपने व्यवसाय के कारण सतर्कता बरतते थे लेकिन सब कुछ धरा का धरा रह गया। बलवंत की अपने पार्टनरों से कोई रंजिश भी नहीं थी। उधर रामगोपाल सिंह ने कहा कि गोली क्यों मारी गई, यह समझ में नहीं आ रहा है। मेरी जानकारी के अनुसार बलवंत की किसी से कोई रंजिश नहीं थी।