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हरिद्वार कुंभ: जूना अखाड़ा नवंबर में करेगा नगर प्रवेश, जनवरी में पेशवाई; काशी में संतों की चर्चा

Mon, 13 Jul 2026 04:02 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी में आयोजित संतों की बैठक में हरिद्वार कुंभ की तैयारियों पर चर्चा हुई। संतों ने बताया कि जूना अखाड़ा नवंबर में नगर प्रवेश करेगा, जबकि जनवरी में पारंपरिक पेशवाई निकाली जाएगी। बैठक में कुंभ की व्यवस्थाओं, संतों की भागीदारी और धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
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बैठक करते जूना अखाड़े के साधु-संत। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Haridwar Kumbha: नासिक कुंभ और हरिद्वार अर्धकुभ में अगले साल होने वाले कुंभ की तैयारी को लेकर रविवार को जूना अखाड़े के बैजनत्था मठ में बैठक हुई। देशभर से आए महामंडलेश्वर, श्रीमहंत आदि पदाधिकारियों और साधु-संतों ने इस पर चर्चा की। 

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अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद महाराज की अगुवाई में तय हुआ कि हरिद्वार में नगर प्रवेश नवंबर में होगी और जनवरी में पेशवाई की जाएगी। हरिद्वार में जनवरी से दो माह तक साधु-संन्यासी रहेंगे। वहां विशिष्ट स्नान के साथ साधना करेंगे।

हरिद्वार में 14 जनवरी से अर्ध कुंभ और नासिक में सिंहस्थ कुंभ दो अगस्त से शुरू होगा। इसमें देशभर में अखाड़े शामिल होंगे। इसे लेकर जूना अखाड़े के प्रधान कार्यालय काशी में देशभर की शाखाओं के पदाधिकारी रविवार को पहुंचे। मोहन भारती ने अखाड़े के सभी शाखाओं में सफाई अभियान चलाने और पौधरोपण करवाने पर जोर दिया।
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स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि यह अभियान जरूर चलाया जाए, ताकि अखाड़ों को नवनिर्माण के साथ स्वच्छ और हरियाली रखा जा सके। सोमवार को सुबह 11 बजे से अखाड़े की कार्यकारिणी की बैठक होगी। 

31 अक्तूबर को होगा ध्वजारोहण : हरिद्वार का अर्धकुंभ मेला अगले साल 14 जनवरी से 20 अप्रैल तक चलेगा। नासिक और त्र्यंबकेश्वर में कुंभ उत्सव का औपचारिक चक्र इसी साल 31 अक्तूबर को ध्वजारोहण के साथ शुरू होगा। 
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मठ, मंदिर सनातन संस्कृति के जीवंत केंद्र
श्रीजपेश्वर महादेव मठ श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े में हुई बैठक में मठ की प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा, धार्मिक गतिविधियों व संगठन की भावी योजनाओं पर विमर्श हुआ। स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि मठ, मंदिर और शिक्षण संस्थान केवल भवन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, राष्ट्रचेतना एवं आध्यात्मिक परंपरा के जीवंत केंद्र हैं।

महंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि जूना अखाड़ा की गौरवशाली परंपरा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सभी संतों एवं सदस्यों का समन्वित प्रयास आवश्यक है। महंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि जूना अखाड़ा सदैव राष्ट्र, धर्म एवं समाजहित में कार्य करता आया है।
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