काशी में पहली बार हनुमान चालीसा की चौपाइयों पर आधारित पेंटिंग तैयार हो रही है। जी, हां रंग और कूची के जरिये हनुमान लला अब कैनवास पर जीवंत होंगे। रंगों के संयोजन से कैनवास पर चौपाइयों को उकेरने का काम कर रहे हैं काशी विद्यापीठ ललित कला विभाग के विभागाध्यक्ष व कलाकार डॉ. सुनील विश्वकर्मा। कई पुरस्कार जीत चुके डॉ. सुनील इन दिनों पवन सुत की चौपाइयों को चित्रों के जरिए बखान करने में लगे हैं। उनके द्वारा तैयार 40 पेंटिंग चित्रकूट के तुलसीदास शोध संस्थान के संग्रहालय में लगाई जाएंगी।
एक पेंटिंग में लगते हैं 10-15 दिन
डॉ. सुनील विश्वकर्मा बताते हैं कि हनुमान चालीसा के दोहे पर पेंटिंग तैयार करने का काम पिछले दो-तीन महीनों से जारी है। अब तक 25 दोहों पर आधारित 25 पेंटिंग तैयार हो चुकी है। पेंटिंग बनाने में कम से कम दस दिन लगते हैं। चौपाइयों में ज्यादा काम होता है, तो उसे बनाने में 15 दिन लग जाते हैं।
पेंटिंग देख पता चलेगा किसी दोहे पर है आधारित
डॉ. सुनील कहते हैं यह प्रभु की कृपा ही है कि वह चालीस चौपाइयों पर आधारित पेंटिंग शृंखला तैयार कर रहे हैं। बारीक ब्रश का इस्तेमाल किया है, जिससे चौपाइयां कैनवास पर जीवंत हो उठती हैं। हर पेंटिंग को देखकर यह पता चल जाएगा कि है चालीसा के किस दोहे पर आधारित है। चित्रों क ो बनाने के लिए ऐक्रेलिक पेंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। डॉ. सुनील ने बताया कि इससे पहले भी रामनगर की रामलीला की शृंखला पर आधारित चित्रों का निर्माण कर चुके है, उन्हें राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया है।
ये है डॉ. सुनील की उपलब्धियां
राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पुरस्कार, 2016 में राज्यस्तरीय पुरस्कार विजेता, 2015-17 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट और ललित कला अकादमी लखनऊ के सदस्य भी हैं।