मंगलवार को पर्यटन विभाग की ओर से काशी गंगा महोत्सव के चतुर्थ चरण की शुरुआत अदिति जायसवाल और नेहा चौहान की युगल भरतनाट्यम की प्रस्तुति से हुई। नृत्य की शुरुआत पुष्पांजलि से हुई। इसमें नर्तकियों ने गुरु और देवता के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। इसके उपरांत अर्द्धनारीश्वर रूप के माध्यम से शिव और शक्ति के अद्वैत भाव को अभिव्यक्त किया।
अंत में तिल्लाना की लय, गति और भाव का अद्भुत समावेश हुआ। डॉ. प्रेम किशोर मिश्र ने सितार, पं. सुखदेव मिश्र ने वायलिन और पं. अंशुमान महाराज ने सरोद वादन से सभी का मन मोह लिया। शुरुआत राग बागेश्री में मध्य एकताल की बंदिश “अपने गरज पकड़ लीनी बहिया...” से हुई। इसके बाद द्रुत तीनताल में निबद्ध रचना और समापन तीनताल के तराने से हुआ।
डॉ. शुभंकर डे ने राग भीम की विलंबित एकताल में “जागे मोरे भाग...” से गायन आरंभ किया। तबले पर कृष्ण कुमार उपाध्याय, संवादिनी पर संगीत पर हर्षित उपाध्याय ने साथ दिया। राहुल और रोहित मिश्र ने युगल गायन की अविस्मरणीय प्रस्तुति दी। तबले पर आनंद मिश्र और संवादिनी पर आदित्य ने संगति दी। उज्जैन से आईं प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना आयुर्धा विपेंद्र शर्मा ने नृत्य से राजघाट पर श्रोताओं को थिरकने पर विवश कर दिया।
रूपन सरकार समंता और वासुमति बद्रीनाथन ने क्रमवार शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। शिवानी मिश्रा ने अपने समूह के साथ कथक नृत्य से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया।