बनारस शहर में वर्टिकल गार्डेन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, इसके माध्यम से फूलों के शौकीन लोग कम जगह में अपने शौक पूरा कर पा रहे हैं। खास तौर पर जहां खाली जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां लोग दीवारों व बालकनी पर इस तरह की बागवानी कर रहें है।
फ्लैट संस्कृति में इसने बागवानी का अच्छा विकल्प पेश किया है। यह देखने में भी खूबसूरत होता है। फिलहाल कुछ प्रमुख जगहों जैसे बडे़ ऑफिस, रेस्तरां, होटल में इस तरह का प्रचलन बढ़ा है। लहरतारा, सिगरा, महमूरगंज जैसे पॉश इलाकों के कई लोगों ने अपने घरों व फ्लैट को वर्टिकल गार्डेन से सजाया है।
वर्टिकल गार्डेन जमीन पर फूलों की खेती नहीं है। यह दीवार के किनारे जमीन से कुछ ईंच ऊपर से उठती हुई आठ-दस फुट की ऊंचाई तक क्षैतिज आकार लेती है। इसके लिए लोहे के फ्रेम दीवार या किसी मजबूत आधार से टिकाया जाता है।
अधिक भारी नहीं हो इसके लिए उसमें प्लास्टिक के छोटे-छोटे गमलों को खांचो में डाला जाता है। इन गमलों में मिटटी की मात्रा कम होती है। इसलिए फूल भी छोटी प्रजाति वाले ही लगाए जाते हैं।
इसमें टपक सिंचाई वाले पानी के पाइप भी फिट रहते हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार चलाया जाता है। हर में कई रेस्तरां व होटल में वर्टिकल गार्डेन स्थापित हो चुके हैं। सिगरा स्थित एक रेस्तरां के मैनेजर शशांक सिंह ने बताया कि यह थोड़ा महंगा शौक है।
आमतौर पर कम से कम 100 वर्गफीट का वर्टिकल गार्डेन तैयार होता है। सिंचाई सुविधा सहित एक वर्गफीट की लागत 900 से 950 रुपये आती है। इस प्रकार सौ वर्गफीट के गार्डेन बनाने में करीब एक लाख रुपये खर्च होते हैं।