ठंड को अलविदा कहते ही गर्मी ने दस्तक दे दी है। तेज धूप निकले के कारण लोगों को ठंड से राहत तो मिलने लगी है, लेकिन अब जगह-जगह प्यास बुझाने के लिए शुद्ध जल तक मिलना मुश्किल हो गया है। अभी गर्मी की शुरूआत है, लेकिन हैंडपंपों ने साथ छोड़ना शुरू कर दिया है।
सोनभद्र जिले के नक्सल प्रभावित मझुई ग्राम पंचायत के ग्रामीण करीब एक किमी दूर खेत में खोदे गए कच्चे कुएं का प्रदूषित पानी उपयोग में ले रहे हैं। वजह कि यहां अभी से ही हैंडपंपों ने साथ छोड़ना शुरू कर दिया है। मार्च के अंत तक पहाड़ी इलाकों में पानी का संकट गंभीर हो जाता है और लोग चुआंड़ों का दूषित पानी पीने के लिए विवश हो जाते हैं।
गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। मध्य मार्च चल रहा है लेकिन इस बार अच्छी बारिश होने के नाते अभी तमाम जगहों पर हैंडपंपों में पानी का लेयर बना हुआ है। इससे लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही लेकिन पानी के संकट की शुरूआत हो गई है। इसके पूर्व फरवरी माह से ही पानी का संकट शुरू हो जाता था और मार्च में तो स्थिति काफी खराब हो जाती थी।
मई, जून की गर्मी में लोग चुआंड़ का दूषित पानी पीने के लिए विवश हो जाते थे, जिससे जल जनित रोगियों की संख्या में इजाफा हो जाता था। इस बार मध्य मार्च से पानी की किल्लत शुरू हो गई है। नगवां ब्लॉक के अति नक्सल प्रभावित चेरूई, बैजनाथ, रामपुर, सोम, लोढ़ा, दुवारी, चिचलिक आदि इलाकों में अभी से पानी की किल्लत होने लगी है।
मझुई ग्राम पंचायत के प्रधान कूंवर जायसवाल की मानें तो उनके यहां जो भी हैंडपंप लगे थे, सभी ने साथ छोड़ दिया है। गांव के लोगों ने बस्ती से करीब एक किमी दूर खेत में कच्चा कुआं खोदा है और उसी का दूषित पानी पीने के लिए विवश हैं।
खोड़ैला के प्रधान पति पृथ्वी सिंह का कहना है कि यदि इस बार पहले से पेयजल संकट के लिए प्रशासन की ओर से निजात के इंतजाम नहीं हुए तो ग्रामीणों को काफी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
उधर चरगड़ा के ग्राम प्रधान यूसूफ अली का कहना है कि उनके क्षेत्र में फिलहाल ठीक स्थिति है लेकिन अप्रैल से पानी का संकट शुरू हो जाएगा।