हमें कुछ बताया भी नहीं गया। हम अब्बाजान के कमरे में तब्दीली नहीं देख सकते। हम यह नहीं होने देंगे। हमारी मांग है कि इसे सिर्फ सरकार बनाए। मुझे तो पता भी नहीं है कि अब्बा हुजूर का कौन सा सामान संजो कर रखा गया है। वो कहां है। उनके सारे अवार्ड और बैठक में लगी तस्वीरें भी न जाने कहां रखी हैं।
वीडीए ने की थी पहल
शहर बनारस के नामचीन लोगों के पुश्तैनी घरों को स्मारक का स्वरूप दिए जाने की वीडीए की योजना था। वीडीए वीसी पुलकित खरे ने इसकी शुरुआत की थी। उस दौरान संत तुलसीदास, कबीरदास, भारतेंदु हरिश्चंद्र, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, पं किशन महाराज, सितारा देवी, मुंशी प्रेमचंद समेत सभी विभूतियों व कलाकारों के घरों का निरीक्षण किया गया। सभी के परिजनों से संपर्क किया गया।
कुछ दिनों बाद जब उनका स्थानांतरण हो गया तो इस दिशा में वीडीए वीसी राहुल पांडेय ने भी पहल की। लेकिन परिजनों का सहयोग नहीं मिलने से यह नहीं हो पाया।
उस्ताद की विरासत को सहेजने में मदद करेगा इंटैक
उस्ताद की विरासत को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक राहत भरी खबर है। इंटैक वाराणसी चैप्टर के अध्यक्ष अशोक कपूर ने बताया कि सरकार अगर उस्ताद की विरासत को सहेजने की पहल करती है तो बनने वाले संग्रहालय में इंटैक भी मदद करने को तैयार है। इंटैक उसमें एक गैलरी कार्नर अपने खर्च पर तैयार करवाएगी।
14वीं पुण्यतिथि पर चाहने वालों ने पेश की खिराज-ए-अकीदत
भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 14वीं पुण्यतिथि शुक्रवार को दरगाहे फातमान में मनाई गई। घरवालों के साथ ही उस्ताद के चाहने वालों ने भी उनकी कब्र पर खिराज-ए-अकीदत पेश की। गुलपोशी के बाद उस्ताद की कब्र पर सामूहिक दुआख्वानी की गई। कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने भी कार्यकर्ताओं के साथ मकबरे पर फूल अर्पित किए।
अजय राय ने कहा कि उस्ताद के जैसा शहनाई वादक न पैदा हुआ है और न होगा। मकान के विवाद पर उन्होंने कहा कि सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। सरकार को यहां संग्रहालय बनाना चाहिए। मकान का जो भी मुआवजा हो उसे उनके परिवार को दिया जाए, ताकि उनकी आर्थिक तंगी खत्म हो सके।