वाराणसी। टेरर फंडिंग के आरोपी हामिद अशरफ के तीन गुर्गों की गिरफ्तारी मऊ से होने के बाद पूर्वांचल के सभी जिलों की पुलिस और आरपीएफ के स्तर से अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से रेल टिकटों की बुकिंग और बिक्री बड़े पैमाने पर करने वाले एजेंटों की गतिविधियाें की टोह ली जा रही है। इनमें से वाराणसी और आजमगढ़ निवासी दो एजेंट शक के घेरे में हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि किसने बैंक या अन्य माध्यम से कितने का लेनदेन किया। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसकी तफ्तीश जल्द ही राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपे जाने की संभावना है।
रेलवे के ई-टिकट के अवैध साफ्टवेयर के जरिए तकरीबन 10 हजार से ज्यादा टिकट एजेंटों को बेचने के साथ ही बस्ती निवासी हामिद अशरफ पर टेरर फंडिंग का आरोप है। हामिद के तार दुबई, पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हामिद इन दिनों दुबई में रह रहा है और अक्सर नेपाल आता-जाता रहता है। सोमवार को बस्ती की पुलिस और आरपीएफ की टीम ने मऊ में छापा मार कर हामिद के तीन गुर्गों को गिरफ्तार किया था। तीनों की गिरफ्तारी के बाद अब अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। माना जा रहा है कि पूर्वांचल के अन्य जिलों के रेल टिकट एजेंट भी हामिद से साफ्टवेयर खरीद कर रेलवे को रोजाना लाखों का चूना लगा रहे होंगे। पुलिस और आरपीएफ की अलग-अलग टीमें एजेंटों को चिह्नित कर उनकी धरपकड़ के लिए सुरागकशी में लगी हुई हैं।
क्या है टेरर फंडिंग
आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आतंकवादी संगठनों के लिए वैश्विक स्तर पर पैसा जुटाया जाता है। इसके लिए व्यक्तिगत दान और धर्मार्थ संगठनों के चंदे के साथ ही मादक पदार्थों व हथियारों की तस्करी, देह व्यापार और जबरन वसूली जैसे हथकंडे अपनाए जाते हैं। पैसा जुटाने के बाद उसे हवाला के जरिये या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के साथ ही सोना जैसी मूल्यवान धातुएं खरीदकर एक स्थान से दूसरे स्थान भेजी जाती हैं। यह काम इतनी गोपनीय तरीके से किया जाता है कि एक नेटवर्क से जुड़े लोग ही एक-दूसरे के बारे में कुछ नहीं जानते हैं।