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ज्ञानवापी परिसर का सर्वे: श्रृंगार गौरी प्रकरण पर अधिवक्ताओं ने दी अपनी अलग-अलग राय, समझें पूरा मामला

Mon, 09 May 2022 01:19 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

ज्ञानवापी प्रकरण में श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन और विग्रहों के संबंध में अदालत के आदेश पर हो रही कार्रवाई सुर्खियों में है। इस पूरे मामले को लेकर वादी और प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं से बातचीत की गई तो दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी राय रखी।
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ज्ञानवापी परिसर से निकलते अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु जैन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी प्रकरण में वादी और प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं से बातचीत की गई तो दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी राय रखी। जहां एक ओर याचिका दायर करने वाली राखी सिंह समेत पांच लोगों के अधिवक्ता ने मामले में पुलिस, प्रशासन द्वारा सहयोग न करने की बात कही तो वहीं प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के उल्लंघन की बात कही है। इसके साथ ही जिला शासकीय अधिवक्ता का कहना है कि न्यायालय के आदेश पर ही कार्रवाई हो रही है। 

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पुलिस, प्रशासन का मिले सहयोग तो नहीं आएगी अड़चन 
वादी पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि विश्व वैदिक सनातन संघ में सदस्य राखी सिंह समेत पांच लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हरिशंकर जैन के निर्देशन में पिछले साल अप्रैल में याचिका दाखिल किया। इसमें श्रृंगार गौरी मंदिर परिसर और ज्ञानवापी परिसर की वस्तुस्थिति वर्तमान में क्या है।
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इसके लिए सर्वे कमीशन की मांग की गई थी। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट आदेश के बाद ज्ञानवापी परिसर में दो दिन सर्वे हुआ। यह कार्यवाही बाहरी हिस्से में बैरीकेडिंग क्षेत्र से बाहर हुई। पूरे मामले में प्रशासन और सुरक्षा बलों का अगर सही तरीके से सहयोग मिले तो किसी तरह की कोई अड़चन नहीं आएगी।

मामले में वर्शिप एक्ट का नहीं हो रहा पालन

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता अभय नाथ यादव ने कहा कि  जिस तरह सर्वे की कार्रवाई चल रही है, वह प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का उल्लंघन है। मंदिर और मस्जिद का कोई विवाद ही नहीं है। मामले में वादी पक्ष की ओर से बस पूजा- पाठ करने का अधिकार मांगा जा रहा है।


उनका कहना है कि देवी-देवताओं की मूर्तियां, विग्रह हैं, उसमें पूजा करने का अधिकार दिया जाए। यही मुकदमा चल रहा है। प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 में कहा गया है कि जो भी उपासना स्थल, जिस तरह से पूजा-पाठ या अन्य जिस रूप में था, वो रहेगा।

इससे यह तय है कि इतने दिनों से यहां नमाज पढ़ी जा रही है, वो पढ़ी जाएगी। नीचे तहखाने में कोई पूजा नहीं हो रही थी तो वह नहीं होनी चाहिए। शृंगार गौरी की पूजा साल में एक बार होती है, वैसी ही होती रहेगी। रोज पूजा करने की मांग की जा रही है। मस्जिद के नीचे तहखाने की वीडियोग्राफी कराने, सर्वे का कोर्ट का स्पष्ट आदेश नहीं है। 

न्यायालय के आदेश पर ही हो रही है पूरी कार्रवाई

जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र प्रसाद पांडेय ने कहा कि राखी सिंह व चार अन्य की ओर से दायर याचिका पर जो भी कार्रवाई इस समय हो रही है, वह न्यायालय के आदेश पर हो रही है। याचीगण ने मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन की ओर से दायर याचिका में मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन, जिलाधिकारी वाराणसी, कमिश्नर ऑफ पुलिस के अलावा अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों को पक्षकार बनाया है। उनका यही कहना है कि शृंगार गौरी का मंदिर जो साल में एक बार खुलता है, उसको प्रतिदिन दर्शन, पूजन का अधिकार दिया जाए। अब मसाजिद कमेटी ने एडवोकेट कमिश्नर को बदलने की मांग की है। 

शृंगार गौरी प्रकरण में तीसरे अधिवक्ता आयुक्त हैं अजय कुमार मिश्र

अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्र - फोटो : अमर उजाला
शृंगार गौरी मंदिर में हर दिन दर्शन पूजन का अधिकार दिए जाने वाली जिस याचिका पर कमीशन की कार्रवाई के लिए अजय कुमार मिश्र को अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त किया गया है, इस मामले में पहले भी दो अधिवक्ता आयुक्त अपनी कमीशन की कार्रवाई पूरी नहीं कर पाए थे। न्यायालय की ओर से नियुक्त अजय कुमार मिश्र तीसरे अधिवक्ता आयुक्त हैं।

जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र प्रसाद पांडेय के अनुसार राखी सिंह व चार अन्य की ओर से याचिका दायर करने के बाद एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने के प्रार्थना पत्र को भी सिविल जज सीनियर डिवीजन ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद पहली बार अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार पांडेय की नियुक्ति हुई, लेकिन वह मामले में कमीशन की कार्रवाई ही नहीं पूरी कर सके।

इसके बाद वादी की ओर से अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त करने का प्रार्थना पत्र दिया गया, जिस पर कोर्ट ने दूसरे एडवोकेट कमिश्नर के रूप में अजीत कुमार पुष्कर को नियुक्त किया। कोर्ट के आदेश के बाद दूसरे एडवोकेट कमिश्नर ने भी कमीशन की कार्रवाई पूरी नहीं की। तीसरी बार अब अजय कुमार मिश्र एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त हुए हैं। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में वह मौके पर गए।
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उन्होंने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मौके पर जाकर कमीशन की कार्रवाई के लिए छह और सात मई की तिथि नियत की। महेंद्र प्रसाद पांडेय ने बताया कि इसके अनुपालन में छह मई को मंदिर परिसर में जो विवादित क्षेत्र हैं, उसके पश्चिमी हिस्से का बैरीकेडिंग के बाहर कमीशन की कार्रवाई हुई।

प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया के लोगों ने एडवोकेट कमिश्नर पर पक्षपात होकर स्थलीय निरीक्षण करने का आरोप लगाते हुए उनकी जगह किसी अन्य की नियुक्ति करने का प्रार्थना पत्र दिया है। इस पर प्रतिवादी सरकार पक्ष की ओर से विरोध किया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि कमीशन का काम न्यायालय के आदेशानुसार एडवोकेट कमिश्नर द्वारा किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में नहीं बदला जाना चाहिए। 
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