हिंदू पक्ष का रुख भी कड़ा
दिलचस्प बात यह है कि इस मध्यस्थता प्रस्ताव को लेकर केवल मुस्लिम पक्ष ही नहीं, बल्कि हिंदू पक्ष की मुख्य वादिनी और पैरोकार भी नाखुश हैं। हिंदू पक्ष का कहना है कि वे किसी भी तरह के 'समझौते' या मध्यस्थता के मूड में नहीं हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट और वजूखाने में मिले कथित 'शिवलिंग' के साक्ष्यों का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष का कहना है कि वे कोई बीच का रास्ता नहीं चाहते, बल्कि उन्हें पूरी 'ज्ञानवापी भूमि' पर मंदिर का अधिकार चाहिए।
दोनों ही पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) द्वारा सुप्रीम कोर्ट के इस मध्यस्थता फॉर्मूले को खारिज किए जाने के बाद, अब यह साफ हो गया है कि 14 जुलाई की प्रस्तावित बैठक बेनतीजा रहेगी। यह मामला अब विशेष लोक अदालत के दायरे से बाहर होकर वापस नियमित अदालती कार्यवाही और कानूनी दांवपेंचों के जरिए ही तय होगा।