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ज्ञानवापी: वाद मित्र को हटाने संबंधित रिवीजन पर आपत्ति दाखिल, आठ सितंबर को होगी सुनवाई; मूल वाद पर भी बहस

Thu, 21 Aug 2025 06:05 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी के दोनों मामले में वादमित्र के ओर से आपत्ति दाखिल की गई है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से आपत्ति दाखिल करने के लिए समय मांगा है। कोर्ट ने दोनों में अगली सुनवाई के लिए तिथि नियत कर दी है।
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वाराणसी कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala
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Varanasi News: जिला जज जय प्रकाश तिवारी की अदालत में बुधवार को ज्ञानवापी के पुराने मामले के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने संबंधित रिवीजन अर्जी पर सुनवाई हुई। एक अन्य आवेदन ट्रांसफर करने के लिए दाखिल पुनः विचार अर्जी पर भी सुनवाई हुई। दोनों अर्जी पर अगली सुनवाई आठ सितंबर की तिथि नियत की गई है। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी के हटाने संबंधित रिवीजन अर्जी पर वाद मित्र ने आपत्ति दाखिल किया है।

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अधिवक्ता अनुष्का तिवारी ने स्थानांतरण आवेदन वर्तमान पुनर्विचार याचिका (रिव्यू) दायर की है, वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी द्वारा लगातार स्थानांतरण का विरोध किया। जिला जज ने स्थानांतरण संबंधित आवेदन खारिज कर दिया था। आदेश पारित होने के बाद कई नए और महत्वपूर्ण तथ्य और दस्तावेज सामने आए हैं, जिनमें विभिन्न तीर्थस्थलों के महंतों और पुजारियों सहित कई हिंदू भक्तों द्वारा दायर हलफनामे शामिल हैं।

ये एक जनप्रतिनिधि वाद है, जिसे स्वर्गीय पंडित सोमनाथ व्यास, प्रो. रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय द्वारा दाखिल किया गया था। यह सिविल जज सीनियर डिवीजन (एफटीसी) न्यायालय में लंबित है। क्योंकि यह मामला प्रमुख है और इसमें जनता की भगवान विश्वेश्वर (विश्वनाथ) के प्रति भावना का प्रतिबिंबित किया गया है।

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निगरानी कर्ता और वाद मित्र ने की बहस, 27 अगस्त को अगली सुनवाई
जिला जज जय प्रकाश तिवारी की कोर्ट में बुधवार को ज्ञानवापी प्रकरण में मूल वाद में पूर्व के वादी स्व. हरिहर पांडेय की तीन बेटियों की ओर से निगरानी अर्जी पर सुनवाई हुई। निगरानी कर्ता और वाद मित्र की ओर से बहस की गई। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तिथि नियत की है। अंजुमन की भी बहस होनी है।

पिछले तिथि पर बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्र, रेनू पांडेय की तरफ से अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने लोअर कोर्ट से मूल पत्रावली तलब करने की गुहार लगाई थी, जिस पर कोर्ट ने मूल पत्रावली तलब की थी। इसके तहत ही कोर्ट में अवर कोर्ट से मूल पत्रावली तलब आई थी।

अवर कोर्ट में बेटियों की ओर से वादी रहे मृतक हरिहर पांडेय के स्थान पर वारिसान के रूप में प्रतिस्थापित करने के अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद बेटियों की ओर से रिकॉल करने के लिए अर्जी दी थी, जिस पर कोर्ट ने रिकॉल प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था।
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