दोनों पक्षों ने कपड़ा बदलने पर सहमति जताई। जिला जज ने शासकीय अधिवक्ता से कहा कि प्रशासन की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र को नॉट प्रेस कर उसकी कॉपी 29 अक्तूबर को अदालत में पेश करने को कहा है। साथ ही कहा कि एएसआई सर्वे के दौरान दोनों पक्षों की जो टीम व जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद थे, उन्हीं के सामने कपड़ा बदलने की कार्यवाही होगी। दरअसल, पिछले तिथि पर कोर्ट में जिला प्रशासन की तरफ से विशेष अधिवक्ता राजेश मिश्रा ने एक अर्जी दाखिल की थी।
अर्जी में कहा गया था कि ज्ञानवापी के सील वजूखाने में लगे हुए कपड़े जर्जर हो गये हैं। इस जर्जर कपड़े को बदलना अति आवश्यक है। उक्त सील वजूखाना के जर्जर कपड़े को बदलने की अनुमति देने की अदालत से गुहार लगाई गई थी। इसमें अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से आपत्ति दाखिल की गई थी। जबकि हिंदू पक्ष के ओर से कोई आपत्ति दाखिल नहीं करने की बात कही गई थी।
2022 में सील हुआ था वजूखाना
साल 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने वाले हिस्से को सील किया गया था। यह वही स्थान है, जहां एएसआई सर्वेक्षण के दौरान शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था। उस समय परिसर में कुल नौ ताले लगाए गए थे और क्षेत्र को अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा में रखा गया था।
अब, तीन वर्षों बाद जब कपड़ा खराब हो गया तो अदालत से इसे बदलने की अनुमति मांगी गई। ताकि परिसर की सुरक्षा और स्थिति बरकरार रखी जा सके। 3 साल से बंद वजुखाने के मुख्य द्वार पर लगा कपड़ा बारिश के पानी और धूप की वजह से एकदम जीर्णशीर्ण हो चुका था। जिला प्रशासन की तरफ से जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत में इसे बदलने को लेकर याचिका दी गई थी।