ज्ञानवापी सर्वे में में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग के लिए 4 अन्य महिला वादियों के अधिवक्ता विष्णु जैन की तरफ से दिए गए आवेदन का विरोध किया गया। कहा गया कि बरामद शिवलिंग का कुछ अंश ड्रोन करके निकालकर कार्बन डेटिंग के लिए जाएगी।
ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले की वादी राखी सिंह की तरफ से जिला जज की अदालत में आवेदन देकर कहा गया कि काशी विश्वनाथ मंदिर सुंदरीकरण के दौरान कर माइकल लाइब्रेरी के मलबे से हजारों वर्ष पुरानी गणेश लक्ष्मी की मूर्ति मिली है जो वाद के निस्तारण में सहायक हो सकती है। उसे संरक्षित रखने की मांग की है।
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ज्ञानवापी सर्वे में में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग के लिए 4 अन्य महिला वादियों के अधिवक्ता विष्णु जैन की तरफ से दिए गए आवेदन का विरोध किया गया। कहा गया कि बरामद शिवलिंग का कुछ अंश ड्रोन करके निकालकर कार्बन डेटिंग के लिए जाएगी। ऐसे में शिवलिंग खंडित हो जाएगा और हिंदू धर्म में खंडित मूर्ति की पूजा नही की जाती।
अदालत में यह आवेदन वादिनी राखी सिंह के प्रतिनिधि जितेंद्र सिंह विसेन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मानबहादुर सिंह और अनुपम द्विवेदी की तरफ से दाखिल किया गया है। 29 सितंबर को इन आवेदनों पर सुनवाई के साथ ऑर्डर 1 रूल 10 के तहत पक्षकार बनने और अधिवक्ता विष्णु जैन की तरफ से सर्वे में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग के आवेदन के साथ वाद बिंदु तय होने व अन्य बिंदुओं पर भी सुनवाई होनी है।