जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में भगवान विश्वेश्वर के वर्ष 1991 के मूल वाद में दो रिवीजन याचिका पर होने वाली सुनवाई नहीं हो सकी। अब दोनों मामले में कोर्ट ने नई तिथि नियत कर दी है। एक मामले में पांच जनवरी जबकि दूसरे मामले में 20 जनवरी को सुनवाई होगी।
लार्ड विश्वेश्वर के 1991 के मूल वाद वाली दोनों रिवीजन याचिका सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से दाखिल की गई है। इसमें यह कहा गया है मामले के सुनवाई का अधिकार सुनवाई कर रही सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट सीनियर डिविजन को नहीं है। ज्ञानवापी वक्फ बोर्ड की संपत्ति होने के कारण मामले की सुनवाई का अधिकार लखनऊ स्थित वक्फ बोर्ड को है।
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के अधिवक्ता रईस अहमद ने बताया कि समय की कमी के कारण जिला जज की अदालत में इस रिवीजन याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब कोर्ट ने 20 जनवरी की तिथि नियत की है। इसी मामले में सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट ने भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण से राडार पद्धति से कराने का आदेश दिया था और अधिकारिता को लेकर चुनौती देने वाले अंजुमन व वक्फ बोर्ड के आवेदन को खारिज कर दिया था। इसी के खिलाफ जिला जज की अदालत में रिवीजन दाखिल किया गया है।
वही, दूसरी तरफ ज्ञानवापी को मुस्लिमों को सौंपने और उर्स कराने की अनुमति के लिए लोहता के मुख्तार अहमद व चार अन्य की तरफ से सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट सीनियर डिविजन की अदालत में दाखिल वाद पर पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण सुनवाई की तिथि पांच जनवरी नियत कर दी गई।