बाबा विश्वनाथ तो हमेशा रहेंगे, नेता तो आते और जाते रहेंगे। बता दें कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि हर मस्जिद में शिवलिंग तलाशने और रोजाना एक नया विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं है। अब ज्ञानवापी का मामला चल रहा है। इतिहास को हम बदल नहीं सकते। वो इतिहास हमारे द्वारा नहीं बनाया गया और ना ही आज के हिंदुओं और मुसलमानों द्वारा बनाया गया।
ज्ञानवापी के लिए कारसेवा का एलान
डॉ. कुलपति तिवारी ने इससे पहले रविवार को ज्ञानवापी के लिए कारसेवा का एलान किया । डॉ. तिवारी ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग को आदिविश्वेश्वर मानते हुए उनकी अविलंब पूजा-अर्चना के लिए वह शिव कारसेवा करेंगे। शिव कारसेवा 15 जून के बाद किसी भी दिन शुरू हो जाएगी।
कारसेवा में शामिल होने के लिए काशी के सभी मंदिरों के महंत और तीर्थ पुरोहितों को आमंत्रण पत्र भेजा जाएगा। मिर्जापुर के तीर्थ पुरोहित और प्रमुख मंदिरों के महंत भी आमंत्रित किए जाएंगे। इस कारसेवा के अंतर्गत शहर की सड़कों पर कोई भीड़-भाड़ इकठ्ठा नहीं होगी। न ही कोई शिव भक्त ज्ञानवापी परिसर में जाकर पूजा अर्चना करने की जिद करके अदालत की कार्रवाई में कोई बाधा उत्पन्न करेगा। सभी शिवभक्त अस्सी से आदिकेशव घाट तक जलमार्ग से शिव कारसेवा करेंगे।