विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन ने सरकार से ज्ञानवापी सर्वे के लीक हुए वीडियो-फोटो मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। इससे जुड़ा पत्र भी केंद्र व राज्य सरकार को भेजा है। उन्होंने प्रदेश और केंद्र सरकार को सात पेज का शिकायती पत्र भेजा है।
कहा है कि यह बात सामने आना जरूरी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव को खतरे में डालने का प्रयास करने वाले राष्ट्र विरोधी लोग कौन हैं। ये गंभीर साजिश के तहत ज्ञानवापी परिसर के सर्वे से संबंधित वीडियो और फोटो को लीक किया गया। इसलिए सर्वे से जुड़े एक-एक व्यक्ति की जांच हो कि आखिरकार वीडियो और फोटो कैसे लीक हुआ। उन्होंने कहा कि वे जांच में सरकार का पूरा सहयोग करेंगे और उनको भी जांच के दायरे में लाया जाए।
ज्ञानवापी मामले में रोजाना नए तथ्य और दावे पेश किए जा रहे हैं। ऐसे में ज्ञानवापी केस के पक्षकार हरिहर पांडेय ने दावा किया है कि उन्होंने ज्ञानवापी मुद्दे का हल निकालने के लिए ़अपनी जमीन देने का प्रस्ताव मुस्लिम पक्ष को दिया था, लेकिन आज तक उन लोगाें ने उस पर कोई पहल नहीं की है। वहीं अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने हरिहर पांडेय के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह झूठ बोल रहे हैं।
मस्जिद के लिए जमीन देने को तैयार
ज्ञानवापी केस के इकलौते जीवित पक्षकार हरिहर पांडेय ने बताया कि 2021 में प्रतिवादी पक्ष के लोग मेरे घर पर हाईकोर्ट का नोटिस लेकर आए थे। उन्होंने मुझसे पूछा था कि इस मसले को सुलझाने का कोई रास्ता निकल सकता है क्या? मैंने कहा कि आप चाहते हैं कि मस्जिद बरकरार रहे और मैं चाहता हूं कि मस्जिद हटे। इसलिए इसका विकल्प यही है कि आप दो, चार, छह या आठ एकड़ जमीन लेकर उस पर मस्जिद का निर्माण करा सकते हैं। मैं अपनी जमीन की रजिस्ट्री आपके नाम से करवा देता हूं।
मेरे इस प्रस्ताव पर आज तक मुस्लिम पक्ष ने कोई जवाब नहीं दिया। जब मैंने सोमनाथ व्यास और प्रो. रामरंग शर्मा के साथ मुकदमा दायर किया था तो हम लोगों को पता था कि यह मुकदमा लंबा चलेगा। सोमनाथ और रामरंग का निधन हो चुका है। हरिहर पांडेय ने कहा कि मेरे बाद मेरी पीढ़ियां इस मुकदमे को लड़ेंगी। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा कि उनका दावा पूरी तरह से गलत है। इस तरह का कोई प्रस्ताव हम लोगों को किसी ने नहीं दिया है। यह बेवजह की अफवाह और कोरी कल्पना की बातें हैं।