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ज्ञानवापी: पीठासीन अधिकारी के अवकाश के चलते सुनवाई टली, 29 जुलाई तिथि नियत, 1991 का है यह मामला

Sat, 26 Jul 2025 05:53 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: इस मामले में पिछले 11 जुलाई को कोर्ट ने वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने संबंधित अर्जी को खारिज कर दिया था। इस के बाद वादी रहे मृतक हरिहर पांडेय की बेटियों की ओर से संशोधित आदेश संबंधित अर्जी दाखिल की गई थी।
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वाराणसी कोर्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Gyanvapi: सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) भावना भारती की अदालत में शुक्रवार को ज्ञानवापी के वर्ष 1991 के पुराने मामले में सुनवाई टल गई। कोर्ट के पीठासीन अधिकारी अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो पाई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।

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पिछले दिनों आदेश संशोधित अर्जी पर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से दाखिल आपत्ति दाखिल की थी। इस पर बेटियों की ओर से प्रति आपत्ति दाखिल करनी थी। पिछले तिथि पर वादी रहे मृतक हरिहर पांडेय के बेटियों की ओर से वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने संबंधित अर्जी पोषणीयता पर ही खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उसी दिन बेटियों की ओर से अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने आदेश में संशोधित करने संबंधित अर्जी दाखिल कर दी थी।

बेटियों की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया कि आदेश त्रुटिपूर्ण है। इस पर आदेश को संशोधित करने की गुहार लगाई है। उस पर गुरुवार को वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से आपत्ति दाखिल की गई है। उसमें कहा गया कि इस मामले में दोनों पक्षों के सुनने के बाद ही कोर्ट ने विधि सम्मत आदेश दिया है। 

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इस आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। इस आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय में रिवीजन कर सकते हैं। संशोधित करने संबंधित कोई भी विधि व्यवस्था नहीं है। क्योंकि इस मामले पक्ष कार के लिए एक मात्र विकल्प सत्र न्यायालय में रिवीजन दाखिल करना है। पक्षकार संबंधित अर्जी पर अंतिम दौर में बहस हो रही थी मगर इस तरह की अर्जी देकर सिर्फ मुकदमे को अग्रिम करवाई में बाधा पहुंचाया जा रहा है।
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