वाद मित्र ने रोक की मांग पर जताई आपत्ति
दूसरी ओर, मुकदमे में वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने वक्फ बोर्ड की मांग पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी के इस मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगाने का कोई विशिष्ट आदेश नहीं दिया है। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस निर्देश का भी उल्लेख किया, जिसमें मुकदमे का निस्तारण छह महीने के भीतर करने को कहा गया था। इसी के तहत अदालत में मामले की त्वरित सुनवाई चल रही है।
इससे पहले जिला जज की अदालत ने सील वजूखाने के ताले पर कपड़ा बदलने से संबंधित प्रशासन की अर्जी पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। फिलहाल ज्ञानवापी के मूल मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने से संबंधित प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई चल रही है।
ऐसे में वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाने संबंधी अर्जी पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 13 नवंबर को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि बोर्ड की मांग पर अदालत क्या रुख अपनाती है और मूल मुकदमे की सुनवाई आगे किस तरह बढ़ेगी।