अधिवक्ता ने अपनी रिविजन याचिका में कहा कि जब उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष और शीघ्र सुनवाई के लिए वाद को अग्रणी मामले के रूप में स्थानांतरित करने की याचिका दाखिल की, तब विजय शंकर रस्तोगी ने उसका भी विरोध किया और स्थानांतरण प्रार्थना को खारिज करवा दिया।
अधिवक्ता अनुष्का तिवारी ने खारिज आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका जिला न्यायालय में दाखिल किया है। पुनरीक्षण याचिका में यह मांग की गई है कि उक्त नियुक्ति के आदेश को रद्द किया जाए और भविष्य में वाद मित्र की नियुक्ति केवल सार्वजनिक सूचना व आपत्तियों के बाद की जाए।
यह सुस्थापित कानून है कि वाद मित्र द्वारा देवता के हित में कार्य नहीं करते है, जबकि वाद जनप्रतिनिधि वाद हो तब भक्तों को वाद में देवता वादी के हित में हस्तक्षेप करने का अधिकार कानून द्वारा प्राप्त है।