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Gyanvapi Case: श्रृंगार गौरी प्रकरण में मुस्लिम पक्ष ने आपत्तियों पर पूरी की दलील, अगली सुनवाई 12 को

Tue, 05 Jul 2022 02:41 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी के ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण में जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऑर्डर 7 रूल 11 के  तहत वाद सुनवाई योग्य है या नहीं पर बहस हुई। अगली सुनवाई अब 12 जुलाई को होगी। 
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वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण मामले में जिला जज की अदालत में सोमवार को सुनवाई हुई। इसमें अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी (मुस्लिम पक्ष) ने दाखिल 51 बिंदुओं पर आपत्ति पर दलील पूरी की। अदालत में अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी।

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मुस्लिम पक्ष अगली सुनवाई में कानूनी बिंदुओं पर दलील रखते हुए कोर्ट से गुजारिश करेगा कि यह वाद ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है और राखी सिंह समेत 5 महिलाओं की तरफ से दाखिल वाद को खारिज किया जाए।

 जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पांच महिलाओं की तरफ से 51 बिंदुओं पर शृंगार गौरी के नियमित दर्शन के लिए दाखिल वाद के सुनवाई योग्य है या नहीं पर बहस चल रही है। मुस्लिम पक्ष ने वाद पर आपत्ति जताते हुए 30 मई 2022 को आपत्ति में 39 बिंदुओं को स्पष्ट किया था।

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सोमवार को इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता अभयनाथ यादव ने सभी 51 बिंदुओं पर कानूनी स्थिति स्पष्ट की। अब अगली तारीख पर कानूनी नजीरों को पेशकर बहस करेंगे कि इन आधारों पर पांच महिलाओं की तरफ से शृंगार गौरी के दर्शन करने के लिए दाखिल याचिका ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है। उधर, एक महिला वादी राखी सिंह की तरफ से अधिवक्ता हरिशंकर जैन, सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी और मदनमोहन यादव को हटाने के लिए आवेदन दिया। 

अदालत कक्ष में केवल 50 लोगों के प्रवेश की अनुमति
सुनवाई के दौरान 50 लोगों को ही अदालत में जाने की अनुमति दी गई। सोमवार को करीब सवा घंटे चली सुनवाई में अंजुमन की तरफ से अभयनाथ यादव के अलावा रईस अहमद, मुमताज अहमद, एखलाक अहमद, मिराजुद्दीन सिद्दीकी और पांच वादी महिलाओं की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु जैन, मानबहादुर सिंह, सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी, अनुपम द्विवेदी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। अदालत कक्ष के बाहर काफी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। कोर्ट में वादिनी राखी सिंह के पैरोकार जितेंद्र सिंह विसेन और अन्य वादिनीगण भी मौजूद रहे।

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता वाद के समर्थन में पेश करेंगे दलीलें

वादी पक्ष के अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने बताया कि अगली तारीख पर मुस्लिम पक्ष की पोषणीयता के बिंदु पर बहस हो जाने के बाद पांच महिलाओं की तरफ से हिंदू पक्ष के अधिवक्ता वाद के समर्थन में दलीलें पेश कर स्थिति स्पष्ट करेंगे। इसी आधार पर अदालत में बताएंगे कि यह मामला सुनवाई योग्य है और यहां विशेष धर्म उपासना स्थल विधेयक 1991 लागू नहीं होगा।

अदालत कक्ष के बाहर काफी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। इधर,  वादी राखी सिंह की तरफ से अधिवक्ता हरिशंकर जैन, सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी और मदनमोहन यादव को हटाने के लिए आवेदन दिया गया। कोर्ट में वादिनी राखी सिंह के पैरोकार जितेंद्र सिंह विसेन और अन्य वादिनीगण भी मौजूद रहे।

ग्रीष्मावकाश के बाद शुरू हुई सुनवाई

दिल्ली की राखी सिंह व वाराणसी की लक्ष्मी देवी, सीता शहू, मंजू व्यास व रेखा पाठक की ओर से दायर याचिका पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे और वहां वजूखाने में दावे वाले शिवलिंग को सील करने का आदेश दिया था। अंजुमन इंतजामिया ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस पूरे मामले की पोषणीयता पर सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत से जिला जज की अदालत में मामला ट्रांसफर कर दिया गया था। जिला जज की अदालत में 26 मई से 30 मई तक सुनवाई चली थी। ग्रीष्मावकाश के चलते सुनवाई चार जुलाई तक टल गई थी। 30 मई के बाद इस मामले में आज सुनवाई हुई। 30 मई को भी मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा था। 
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इससे पहले मसाजिद कमेटी के अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि विशेष धर्म उपासना स्थल विधेयक 1991 यहां लागू होगा, जिसमें आजादी के समय धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, वही रहेगी। जबकि हिंदू पक्ष की दलील है कि यहां विशेष धार्मिक उपासना स्थल काननू लागू नहीं होगा, क्योंकि यहां आजादी के बाद भी श्रृंगार गौरी की पूजा होती थी।

अंजुमन इंतजामिया के अधिवक्ता अभय नाथ यादव वाद की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए आपत्ति में दर्शाए गए 52 में से 39 बिंदुओं पर अपनी दलीलें पेश कर चुके हैं। उनकी दलील अभी जारी है। 12 जुलाई को अब सुनवाई होगी। इस दिन ये हो सकता है कि हिंदू पक्ष की ओर से दायर मामला सुनवाई योग्य है या नहीं।
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