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Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पूजा की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- ग्रीष्मावकाश के बाद आएं

Wed, 08 Jun 2022 03:30 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

ज्ञानवापी  में मिले शिवलिंग के राग-भोग-पूजा-अर्चना को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में अर्जी दी थी, जिसपर बुधवार को सुनवाई हुई। याचिका को निरस्त करते हुए जिला जज ने कहा कि ग्रीष्मावकाश के बाद नया वाद दाखिल करने के लिए वादी स्वतंत्र है। 
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ज्ञानवापी मामले की आज सुनवाई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ज्ञानवापी  में मिले शिवलिंग के राग-भोग-पूजा-अर्चना की याचिका को अदालत ने बुधवार को खारिज कर दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में अर्जी दी थी, जिसपर बुधवार को सुनवाई सुनवाई हुई। अधिवक्ता ने इस वाद को अर्जेंट वाद का बताकर ग्रीष्मावकाश में वेकेशन जज से सुनवाने की मांग की थी।

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इसपर जिला जज ने टिप्पणी करते हुए इसे अर्जेंट वाद मनाने से इंकार कर दिया। याचिका को निरस्त करते हुए जिला जज ने कहा कि ग्रीष्मावकाश के बाद नया वाद दाखिल करने के लिए वादी स्वतंत्र है। अदालत ने कहा कि शिवलिंग बरामद होने की जानकारी 16 मई को ही हो गई थी। ऐसे में 31 मई तक वाद दाखिल नहीं किया। ऐसे में ग्रीष्मावकाश में आवेदन दाखिल करना वाद की अर्जेंसी नहीं है। अर्जेंट सुनवाई का वाद निरस्त किया जाता है।

इससे पहले मंगलवार को ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग के राग, भोग, पूजन-अर्चन की मांग पर मंगलवार को जिला जज की अदालत में सुनवाई पूरी कर ली गई। राग, भोग के लिए अनुमति देने की याचना के लिए वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने करीब आधे घंटे तक दलीलें दीं। अदालत ने सुनवाई के बाद आदेश के लिये पत्रावली सुरक्षित कर ली। अब इस मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है।

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 108 घंटे बाद ग्रहण किया जल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी में पूजन-अर्चन से रोके जाने पर अन्न जल त्याग कर अनशन पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार सुबह 108 घंटे बाद गुरु के आदेश पर जल ग्रहण किया। शिवलिंग पूजन की मांग को लेकर वह बीते शनिवार सुबह से अनशन पर थे और उनका स्वास्थ्य भी गिरता जा रहा था।
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बुधवार को केदारमठ स्थित श्रीविद्यामठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भगवान आदि विश्वेश्वर की पादुकाओं का प्रतीक पूजन कर सुबह सात बजे निर्जल तपस्या संपन्न करने की घोषणा की। कहा कि गुरु आज्ञानुसार भगवान आदि विश्वेश्वर के भव्य मंदिर निर्माण के लिए अब वह देशव्यापी अभियान चलाएंगे।
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