ज्ञानवापी परिसर में नमाज व उर्स करने, पूरा परिसर मुस्लिम पक्ष को सौंपने और हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग लेकर दायर वाद पर सोमवार को द्रुतगामी सिविल जज सीनियर डिवीजन महेंद्र कुमार पांडेय ने सुनवाई की। इसमें विपक्षियों को जवाब दाखिल करने के लिए 17 अक्टूबर की तिथि नियत की है।
ज्ञानवापी परिसर को मुस्लिमों को सौंपने, हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध और नमाज करने की अनुमति के वाद पर सोमवार को द्रुतगामी सिविल जज सीनियर डिवीजन महेंद्र कुमार पांडेय ने सुनवाई की। इसमें विपक्षियों को जवाब दाखिल करने के लिए 17 अक्टूबर की तिथि नियत की है।
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मुख्तार अहमद की ओर से दायर वाद में विपक्ष की ओर से पक्षकार बनने के लिए कई आवेदन दिए गए थे। इस पर सोमवार को वादी मुख्तार अहमद की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। इस आपत्ति पर अब विपक्षियों से जवाब मांगा गया है।
बता दें कि इस मामले में हिंदू पक्ष की तरफ से रंजना अग्निहोत्री, रमेश उपाध्याय समेत कई को पक्षकार बनाने संबंधी ऑर्डर 1 रूल 10 के तहत दिए गए आवेदन पर सुनवाई के लिए तीन अक्तूबर को सुनवाई की तिथि नियत की गई थी। वाद में ज्ञानवापी में नमाज व उर्स करने, पूरा परिसर मुस्लिम पक्ष को सौंपने और हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग की गई थी।
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महत्वपूर्ण यह कि एक नाबालिग रामेश्वर उपाध्याय ने भी हिंदू पक्षकार बनने की अर्जी दी है। अधिवक्ता रमेश उपाध्याय का कहना है कि हम शंकराचार्य के शिष्य के रूप में पक्षकार बनकर पक्ष रखेंगे। वहीं अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने अदालत में कहा कि यह हिंदू धर्मावलंबियों के हित और अहित से जुड़ा मामला है। इससे पूरा समाज प्रभावित है। ऐसे में पक्षकार बनाया जाय।