एडीजीसी प्रमथेश पांडेय और विशेष लोक अभियोजक कमलेश कुमार यादव के मुताबिक आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन के निरीक्षक राकेश सिंह ने 17 दिसंबर 2014 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में दुर्लभ पांडुलिपियों व ग्रंथों के प्रकाशन के लिए नौ करोड़ 59 लाख रुपये शासन से जारी हुआ था।
उसमें से तीन करोड़ रुपये का प्रकाशन किया गया और पांच करोड़ 68 लाख रुपये का गबन विश्वविद्यालय के वित्त विभाग से जुड़े अधिकारियों और प्रिंटिंग प्रेस संचालकों ने कर लिया। मामले के इन दो आरोपियों पर आरोप है कि बिना प्रकाशन किए सात लाख 61 हजार रुपये का चेक प्राप्त किया। अदालत ने इन परिस्थितियों में अपराध को गंभीर मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
देह व्यापार के दो अलग-अलग मामलों में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम देवकांत शुक्ला की कोर्ट ने एक युवक और तीन महिलाओं की जमानत अर्जी खारिज कर दी। एडीजीसी रोहित मौर्य के अनुसार भेलूपुर प्रभारी निरीक्षक ने न्यू कॉलोनी पटिया स्थित एक मकान में छापा मारकर चार कमरों में आपत्तिजनक अवस्था में आठ युवक-युवतियों को पकड़ा था। इसके अलावा लोहता थाना क्षेत्र के बनकट स्थित सीमेंट पाइप बनाने की फैक्ट्री से दो युवकों और युवतियों को आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था।