सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत के आदेश पर पूरी हुई कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट में 26 साल पहले वाली हकीकत ही सामने आई है। आजादी के बाद से चल रहे ज्ञानवापी विवाद में यह तीसरी बार कमीशन की कार्यवाही पूरी हुई है।
सेंट्रल बार के पूर्व अध्यक्ष विवेक शंकर तिवारी का कहना है कि कमीशन की कार्यवाही पूरी होने और रिपोर्ट दाखिल होने के बाद सभी न्यायालय के आदेश के इंतजार में हैं। इस विवाद में अब तक आई कमीशन रिपोर्ट को मानें तो पुरातात्विक सर्वेक्षण बेहद जरूरी है। वजूखाने में मिले शिवलिंग की स्थिति स्पष्ट करने के लिए जांच को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। सर्वे रिपोर्ट की स्पष्ट आख्या कोर्ट मंगवाए।
प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वर के वादमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी का दावा है कि वजूखाने में मिला शिवलिंग तारकेश्वर महादेव का है। उन्होंने कहा कि पुरातात्विक सर्वेक्षण से ही सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिक्षेत्र के पुरातात्विक सर्वेक्षण संबंधी अपील के दौरान अदालत में उन्होंने सारे साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।
उन्होंने बताया कि इतिहासकार डॉ. एएस अल्तेकर ने किताब हिस्ट्री ऑफ बनारस में ज्ञानवापी के मौजूदा वजूखाना की जगह तारकेश्वर लिखा था। इसलिए यह साफ है कि वजूखाने में मिला शिवलिंग तारकेश्वर महादेव का है। जेम्स प्रिंसेप के नक्शे में भी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र को लेकर वजूखाने की जगह तारकेश्वर मंदिर दर्शाया गया था।
कहा कि बनारस आए ईस्ट इंडिया कंपनी के जेम्स प्रिंसेप और इतिहासकार डॉ. एएस अल्तेकर के नक्शे में मस्जिद के वजूखाने की जगह तारकेश्वर महादेव के मंदिर लिखा गया है। उन्होंने इसकी सही जानकारी के लिए रडार तकनीक से पुरातात्विक सर्वेक्षण की अदालत से मांग की है। उम्मीद है कि जल्द ही अदालत की ओर से इसका आदेश दिया जाएगा।