अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी
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अधिवक्ताओं की टीम रखेगी केंद्र सरकार का पक्ष
वहीं, ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी प्रकरण में चार अधिवक्ताओं की टीम केंद्र सरकार का पक्ष रखेगी। इसके लिए भारत सरकार की ओर से अदालत में अधिवक्ता अमित कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में अधिवक्ता राहुल मिश्रा, रजनीश अग्रवाल व शंभू शरण सिंह ने जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। केंद्र सरकार के अधिवक्ताओं ने अदालत से वाद-पत्र व अंतरिम निषेधाज्ञा और उससे संबंधित सबूत की कॉपी वादी से दिलाने की मांग की है।
अखिलेश और ओवैसी मामले की सुनवाई अब 20 को
ज्ञानवापी के वजूखाने में गंदगी करने और नेताओं की बयानबाजी को लेकर निचली अदालत के आदेश के खिलाफ लंबित पुनरीक्षण याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अपर जिला जज (नवम) की अदालत में लंबित इस मामले में पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई टल गई और 20 जुलाई की तिथि मुकर्रर कर दी गई।
अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव व एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दिए गए बयान को हेट स्पीच की श्रेणी में मानते हुए एसीजेएम पंचम (एमपी-एमएलए) की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। आरोप लगाया था कि इन नेताओं ने अमर्यादित व गैर कानूनी बयान देकर हिंदू समाज के प्रति घृणा फैलाने का आपराधिक कृत्य किया है।
अदालत ने 14 फरवरी 2023 को हरिशंकर पांडेय की इस प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ चार मार्च को हरिशंकर पांडेय ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। इस याचिका की अपर जिला जज (नवम) की अदालत में सुनवाई चल रही है।