अधिकार सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ को है। गौरतलब है कि प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ की तरफ से वर्ष 1991 से लंबित मुकदमे में अवर न्यायालय में आवेदन देकर कहा गया था कि ज्ञानवापी परिसर का रडार तकनीक से पुरातत्विक सर्वेक्षण कराया जाए, जिससे साबित हो सके कि वहां शिवलिंग पहले से है।
इसके साथ ही परिसर में पूजापाठ की अनुमति मांगी गई है। इसी के खिलाफ अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की निगरानी याचिका लंबित है। जबकि, सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी निगरानी याचिका दाखिल की है, जिस पर तीन हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।