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ज्ञानवापी प्रकरण : तीनों पक्षों ने पेश की दलीलें, जिला जज ने आदेश रखा सुरक्षित

Tue, 20 Oct 2020 06:43 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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वाराणसी के ज्ञानवापी प्रकरण में जिला जज यूसी शर्मा की अदालत ने मंगलवार को सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की निगरानी याचिका विचारार्थ स्वीकृत होने के मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। इससे पहले अदालत में तीनों पक्षों ने अपनी दलीलें पेश की।

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प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ की तरफ से वाद मित्र विजयशंकर रस्तोगी, आरपी पांडेय, अमरनाथ शर्मा और सुनील रस्तोगी ने दलीलें पेश की। सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से मोहम्मद तौफीक और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से मुमताज अहमद ने दलीलें पेश की।

भगवान विश्वेश्वर की तरफ से दलील दी गई कि अवर न्यायालय के अंतरिम आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत दाखिल नहीं की जा सकती है। वहीं, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से दलील दी गई कि अवर न्यायालय को ज्ञानवापी मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है, अपितु सुनवाई का।
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अधिकार सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ को है। गौरतलब है कि प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ की तरफ से वर्ष 1991 से लंबित मुकदमे में अवर न्यायालय में आवेदन देकर कहा गया था कि ज्ञानवापी परिसर का रडार तकनीक से पुरातत्विक सर्वेक्षण कराया जाए, जिससे साबित हो सके कि वहां शिवलिंग पहले से है।

इसके साथ ही परिसर में पूजापाठ की अनुमति मांगी गई है। इसी के खिलाफ अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की निगरानी याचिका लंबित है। जबकि, सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी निगरानी याचिका दाखिल की है, जिस पर तीन हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
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