अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद अखलाक और मुमताज ने पक्ष रखा। कमेटी के अधिवक्ताओं ने रिवीजन अर्जी की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे दाखिल करने का अधिकार नहीं है।
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साल 1991 के ज्ञानवापी मुकदमे में वादी पक्षकार हरिहर पांडेय की तीन बेटियों को पक्षकार बनाने और वादमित्र को हटाने से संबंधित प्रकरण में मंगलवार को विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत में सुनवाई हुई।
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अवर न्यायालय के आदेश के खिलाफ दाखिल रिवीजन अर्जी पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद अखलाक और मुमताज ने पक्ष रखा। कमेटी के अधिवक्ताओं ने रिवीजन अर्जी की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे दाखिल करने का अधिकार नहीं है।
मुकदमे में बार-बार प्रार्थना पत्र दाखिल कर सुनवाई में विलंब किया जा रहा है। ऐसे में रिवीजन अर्जी पोषणीय नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। वहीं, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। इस पर अदालत ने बोर्ड की बहस का अवसर समाप्त कर अगली सुनवाई के लिए सात नवंबर की तिथि निर्धारित की। अगली सुनवाई पर तीनों बेटियों की ओर से अधिवक्ता अपना पक्ष रखेंगे।
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ज्ञानवापी मुकदमे के वादी पक्षकारों में शामिल हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनकी तीन पुत्रियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेनू पांडेय ने पक्षकार बनाने के लिए सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था।