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ज्ञानवापी में सर्वे जारी रहेगा: जिला जज ने कहा- एएसआई सरकारी संस्था, कोई नई शर्त नहीं थोपी जा सकती

Fri, 29 Sep 2023 05:28 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

Gyanvapi Masjid Case: वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में जारी एएसआई सर्वे को रोकने संबंधी मसाजिद कमेटी की अर्जी को जिला जज की अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि सर्वे में मिल रहे साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश पहले ही डीएम को दे चुके हैं।
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ज्ञानवापी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वे रोकने संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने कहा कि मुकदमे के वादीगणों पर कोई नई शर्त नहीं थोपी जा सकती है। एएसआई कोई प्राइवेट संस्था नहीं है। वह सरकारी काम कर रही है। इसका खर्च देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है।

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अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की सर्वे रोकने संबंधी याचिका बीते तीन अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट, फिर चार अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है। सर्वे जारी है। इसमें स्थानीय अदालत को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। सर्वे कमीशन नियुक्त करने का आदेश अंतिम हो गया है। एएसआई कोई प्राइवेट संस्था नहीं है।

एएसआई का दायित्व है कि वह किसी स्थान का वैज्ञानिक सर्वे करे और न्यायालय के आदेश का अनुपालन कर अपना काम पूरा करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करे। एएसआई ने एक सरकारी काम किया है। इसके लिए उसे व्यय की कोई राशि दिलाया जाना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने कहा कि मसाजिद कमेटी का प्रार्थना पत्र बलहीन है, इसलिए उसे खारिज किया जाता है।
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ये भी पढ़ें: ज्ञानवापी में एएसआई सर्वे रोकने की अर्जी खारिज, अदालत ने कहा- मसाजिद कमेटी चाहे तो सुप्रीम कोर्ट जाए

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ये थी अंजुमन की मांग

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने एएसआई को खर्च न दिए जाने का हवाला देते सर्वे रोकने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज करते हुए टिप्पणी की है।
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ज्ञानवापी से जुड़े दो मामलों की सुनवाई आज

ज्ञानवापी से जुड़े दो मामलों की सुनवाई शुक्रवार को होगी। शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास ने व्यासजी के तहखाने पर कब्जे का अंदेशा जताते हुए उसे डीएम की सुपुर्दगी में दिए जाने का अनुरोध किया है। इसकी सुनवाई जिला जज की अदालत करेगी। वहीं, शैलेंद्र योगीराज की तरफ से ज्ञानवापी में अधिवक्ता आयुक्त के सर्वे के दौरान मिली शिवलिंग जैसी आकृति के पूजा-पाठ व राग-भोग के लिए दाखिल अर्जेंट वाद के स्थानांतरण प्रार्थना पत्र पर भी जिला जज की अदालत में सुनवाई होनी है।
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