पुरातत्वविद प्रो. अशोक ने कहा कि फिलहाल जो साक्ष्य हैं, उसे देखकर लगता है कि इमारत का निर्माण नागर शैली का है। नागर शैली की शुरूआत गुप्त काल से होती है। उत्तर भारत में जितने भी मंदिर हैं, सभी नागर शैली में निर्मित हैं। गुप्त काल चार सौ से पांच सौ ईस्वी पूर्व का माना जाता है। हालांकि, इमारत इतनी पुरानी है या नहीं, यह तो जांच का विषय है। लेकिन, इसकी शैली देखकर लगता है कि इसे आठवीं और नौवीं शताब्दी में बनाया गया होगा।
कोर्ट कमिश्नर की कार्रवाई के दौरान ज्ञानवापी परिसर में गए प्रो. अशोक सिंह ने बताया कि उस कालखंड की इमारत इतनी भव्य और मजबूत थी कि उसका स्वरूप पूरी तरह से नहीं बदला जा सका। इमारत के ढांचे को ही दूसरा रूप देने का प्रयास किया गया। हालांकि, बहुत हद तक सफलता नहीं मिल सकी थी। ज्ञानवापी का पिछला ढांचा देखकर यह तथ्य साफ हो जाता है। तहखाने का हर खंभा साक्ष्य के तौर पर देखा जा सकता है। एएसआई को जल्द ही ढेर सारे साक्ष्य मिल जाएंगे। इसके जरिये नतीजों पर पहुंचा जा सकेगा। तय किया जा सकेगा कि किसका दावा सही और किसका गलत है।