कोर्ट परिसर के बाहर खुशी मनाता हिंदू पक्ष
- फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी मुकदमे की वादिनी रेखा पाठक, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और सीता साहू ने बीते 16 मई को अदालत में आवेदन दिया था। कहा था कि ज्ञानवापी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील वजूखाने को छोड़ कर वर्ष 1993 से जो क्षेत्र बैरिकेडिंग के अंदर है, उसका एएसआई से रडार तकनीक से सर्वे कराया जाए। आवेदन पर 19 मई को अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति की तो हिंदू पक्ष ने 22 मई को अपनी दलील रखी थी। सात जुलाई को जिला जज के अवकाश पर रहने के कारण 12 जुलाई की तिथि सुनवाई के लिए नियत की गई।
हिंदू पक्ष ने आवेदन के निस्तारण पर बल दिया तो मसाजिद कमेटी ने आपत्ति के लिए समय मांगा और 14 जुलाई की तिथि सुनवाई के लिए नियत की गई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव भी अदालत में मौजूद रहे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज की अदालत ने 14 जुलाई को आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली थी। शुक्रवार की शाम जिला जज की अदालत ने मसाजिद कमेटी की आपत्ति को खारिज करते हुए हिंदू पक्ष का आवेदन स्वीकार करते हुए एएसआई से सर्वे का आदेश दिया।
वाराणसी कोर्ट परिसर में हिंदू पक्ष के अधिवक्ता
- फोटो : अमर उजाला
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत में दलील दी कि सील किए गए वजूखाना को छोड़कर ज्ञानवापी के शेष अन्य स्थान का सर्वे कराया जाए। मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे धप-धप की आवाज आती है। उसके नीचे एक और शिवलिंग मिलने की संभावना है। मस्जिद की पश्चिमी दीवार और पूरे परिसर का सर्वे कराने से इतिहास सामने आएगा। अदालत बिना आवेदन के भी सर्वे का आदेश दे सकती है। ऐसा साक्ष्य एकत्र करने के लिए और मौके की स्थिति को समझने के लिए अदालत कर सकती है। एएसआई से सर्वे के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश बाधित नहीं करता है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर भी नहीं रोक लगाई है।
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से कहा गया कि हाईकोर्ट के 12 मई के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 19 मई से स्टे है। एएसआई सर्वे के आवेदन को सुनने का अधिकार जिला जज को नहीं है। दूसरी अहम बात यह है कि इस मामले में एक बार सर्वे हो चुका है। उस पर आपत्ति भी की गई है। बगैर उसके निस्तारण के सर्वे का दूसरा आदेश नहीं दिया जा सकता। हिंदू पक्ष ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात कही है, लेकिन उसका कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है।