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Gyanvapi ASI Survey: ज्ञानवापी परिसर में अंदर सर्वे, बाहर चारों तरफ हर-हर महादेव की गूंज, तस्वीरों में देखें

Mon, 24 Jul 2023 08:00 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश के लिए लगी भक्तों की कतार - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर में सोमवार को जहां एक तरफ सर्वे की कार्रवाई चल रही थी, वहीं राम-राम की रसधार के बीच शिव का नाम गूंज रहा था। भारी इंतजाम और सुरक्षा को देखकर एकबारगी तो श्रद्धालु कुछ पल के लिए ठिठके, लेकिन जैसे ही उनको पता चला कि ज्ञानवापी में सर्वे का काम हो रहा है तो उनके भी हर्ष का कोई ठिकाना नहीं रहा। हर हर महादेव का जयघोष हुआ, जो लगातार चलता रहा। सावन के तीसरे सोमवार को सुबह सात बजे से पहले ही भारी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स, पुलिस और पीएसी गेट नंबर चार पर पहुंचने लगी।
यातायात को दुरुस्त कराने के साथ ही काशी विश्ववनाथ धाम के गेट नंबर चार के सामने की सड़क को खाली करा दिया गया। अचानक पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती, चहल-पहल से कतारबद्ध श्रद्धालु भी सकते में आ गए। कुछ को लगा कि शायद कोई वीआईपी आने वाला है। इसी बीच पता लगा कि ज्ञानवापी की असलियत को सामने लाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जा रही है तो सबके चेहरे खिल उठे। 
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काशी विश्वनाथ धाम के बाहर तैनात फोर्स - फोटो : अमर उजाला
काशी विश्वनाथ धाम में एक तरफ मोरारी बापू की राम कथा से राम नाम की रसधार बही और दूसरी ओर हर-हर महादेव का जयघोष लगाते हुए भक्तों की टोलियां बाबा के जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ी। दूर से हर कोई बस टीम की कार्रवाई की एक झलक पाना चाह रहा था। सच जल्द सामने आए, इसकी कामना भी कर रहा था।
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सर्वे के दौरान ज्ञानवापी परिसर के बाहर तैनात कमांडों - फोटो : अमर उजाला
बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आए मध्य प्रदेश के रीवा के देवतालाब निवासी रमानिवास तिवारी, यूपी के मऊ के कृष्णाकांत तिवारी, गाजीपुर की ललिता देवी, भदोही के लालजी पांडेय, चंदौली के चकिया निवासी अवधेश यादव सहित अन्य श्रद्धालुओं ने कहा कि वर्षों से जारी विवाद का सच तो सामने आना ही चाहिए। 

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काशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर चार पर तैनात सुरक्षाकर्मी - फोटो : अमर उजाला
अदालत के आदेश से वैज्ञानिक तरीके से जांच करके ज्ञानवापी के सच को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। जब सर्वे का काम बंद हुआ तो श्रद्धालुओं ने निराशा जताई। उनका कहना था कि मौजूदा संरचना को बगैर नुकसान पहुंचाए वैज्ञानिक तरीके से सच को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है तो उसे रोकना नहीं चाहिए।
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ज्ञानवापी परिसर के बाहर हिंदू पक्ष की महिलाएं और उनके अधिवक्ता - फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी परिसर का सच ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक से सामने आएगा। एएसआई की टीम सोमवार को जीपीआर उपकरण के साथ पहुंची। इसे परिसर के पश्चिमी हिस्से में लगाकर जांच की गई। डीजीपीएस तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। एएसआई के अफसरों के अनुसार जीपीआर तकनीक खुदाई किए बगैर जमीन के नीचे की असलियत जानने का सस्ता और समय बचाने वाला जरिया है।
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ज्ञानवापी पहुंची सर्वेक्षण टीम - फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी परिसर में सर्वे का मामला सोमवार को सोशल मीडिया पर छाया रहा। ट्विटर पर करीब छह घंटे तक #Varanasi, #Gyanvapi और #Kashivishwanath टॉप ट्रेंड में रहा। लाखों यूजर्स ने लाइक, री ट्वीट और रिप्लाई के जरिये अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। हजारों लोगों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपने व्यूज शेयर किए। तरह-तरह के कमेंट भी किए गए। इनमें से अधिकतर ट्वीट ज्ञानवापी सर्वे के समर्थन से संबंधित थे। 
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ज्ञानवापी - फोटो : अमर उजाला
गीतकार मनोज मुंतशीर ने ट्वीट किया सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। दिल्ली के नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया कि शांति, अमन चैन कभी झूठ की नींव पर स्थापित नहीं हो सकते। ज्ञानवापी में सर्वे का विरोध, विज्ञान का विरोध है। सच को सामने आने से रोकने की साजिश है। सर्वे एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इससे केवल वो डरेंगे जो कुछ छिपा रहे हैं। 
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