उनके प्रार्थना पत्र के अनुसार, 1 मई 2026 को आजाद बिंद की हत्या के मामले में रवि यादव, प्रदीप बिंद और भोले राजभर को आरोपी बनाया गया था। रवि यादव पर इनाम घोषित होने के बाद वह गिरफ्तारी के डर से दिल्ली चला गया। आरोप है कि पुलिस ने 23 मई को दिल्ली स्थित सुरेंद्र कश्यप के आवास से रवि को गिरफ्तार कर जौनपुर लाया और 24 मई की रात उसे सुरेरी थाने के लॉकअप में रखा। इसके बाद 25 मई की रात करीब 1:25 बजे गोरारी तिराहे के पास फर्जी मुठभेड़ दर्शाकर उसकी हत्या कर दी गई।
परिवाद में कहा गया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार रवि यादव के सीने में एक गोली आर-पार मिली, जिससे नजदीक से गोली मारने की आशंका जताई गई है। यह भी आरोप लगाया गया कि कथित मुठभेड़ के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
परिवादिनी का कहना है कि उन्होंने पुलिस अधीक्षक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब अदालत ने मामले में वाद दर्ज कर खेतासराय थाने से रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी।