बीएचयू के छात्र सुमित मोदनवाल ने किया शोध।
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बीएचयू में एक ऐसा रासायनिक तत्व तैयार किया गया है जो कि एलईडी टीवी की लाइफ बढ़ा सकता है। साथ ही बिजली की खपत भी घटेगी। वहीं टैग के रूप में नकली उत्पादों का पता लगाया जा सकता है। बीएचयू के प्रो. हिदयेश मिश्रा के निर्देशन में शोध छात्र सुमित मोदनवाल ने लैंथनम नियोबेट का एक फास्फोर बनाया है।
इस पर यूवी और नियर इंफ्रारेड लाइट प्रकाश पड़ते ही बेहद तेज हरा प्रकाश निकलता है। इस फास्फोर से बनी एलईडी ज्यादा चमकदार होती है जो कि जल्दी खराब नहीं होती। यह सामग्री भविष्य में डिस्प्ले पैनल, ट्रैकिंग लाइट्स, बायो इमेजिंग और ऑप्टो इलेट्रॉनिक डिवाइसेज में बड़े पैमाने पर उपयोगी हो सकती है।
बीएचयू स्थित भौतिक विज्ञान विभाग में हुआ ये रिसर्च जर्नल ऑफ अलॉयज एंड कंपाउंड्स और एसीएस एप्लाइड ऑप्टिकल मटेरियल्स जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में छप चुका है। इसके लिए सुमित को बीएचयू और आईआईएसईआर में सम्मानित भी किया जा चुका है। सुमित ने बताया कि ये तकनीक नकली उत्पादों की पहचान में उपयोगी है। क्योंकि दवाइयों, दस्तावेजों, मुद्रा या उत्पाद पैकेजिंग पर गोपनीय सुरक्षा मार्किंग टैग के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।