इकलौता बेटा था राजन, हादसे ने दो पीढ़ियों को एक साथ छीन लिया
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संवाद न्यूज एजेंसी मिर्जामुराद। जिस नाती की नजर उतरवाने के लिए नाना उसे घर से लेकर निकले थे, उसी मासूम के साथ उनकी भी जिंदगी की डोर टूट गई। मंगलवार शाम रेलवे ट्रैक पर हुए हादसे में नाना और तीन साल के नाती की मौत हो गई। माता-पिता के इकलौते बेटे राजन उर्फ राजा की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। जिस आंगन में मासूम की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अचानक मातम पसर गया। हादसे ने दो पीढ़ियों को एक साथ छीन लिया। मिर्जामुराद के लच्छापुर गांव निवासी दुलचंद्र राजभर (56) मंगलवार शाम सात बजे तीन साल की नाती राजन उर्फ राजा को नजर उतरवाने के लिए पैदल लेकर निकले थे। राजन जंसा थाना क्षेत्र के परमपुर निवासी जितेंद्र राजभर का इकलौता बेटा था। नजर उतरवाने के बाद दोनों घर लौट रहे थे। रास्ते में पानी भरा होने के कारण वे रेलवे ट्रैक की ओर से गुजरने लगे। इसी दौरान प्रयागराज से वाराणसी और वाराणसी से प्रयागराज की ओर जा रही ट्रेनों की चपेट में आ गए। हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर कानूनी पूरी की। थाना प्रभारी गोपालजी कुशवाहा ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। नाना और नाती की मौत से लच्छापुर और परमपुर गांव में शोक का माहौल है।
एक महीने पहले मां के साथ आया था ननिहाल परिजनों के मुताबिक, राजन करीब एक महीने पहले अपनी मां पूनम राजभर के साथ ननिहाल आया था। मंगलवार को नाना के साथ निकला मासूम घर वापस नहीं लौटा। हादसे की खबर मिलते ही परिजन घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। इकलौते बेटे को खोने के सदमे से जितेंद्र और पूनम का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के लोगों को संभालना मुश्किल हो गया।