विश्व शांति भवन के उद्घाटन में राज्यपाल
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि सुख शांति के लिए चरित्रवान होना आवश्यक है। हम चरित्रवान होंगे तभी दूसरों का चरित्र निर्माण कर सकेंगे। ऐसा ही कार्य विश्व के 137 देशों में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय अपने सेवा केंद्रों के माध्यम से कर रहा है। वे बुधवार को भदोही के रजपुरा स्थित विश्व शांति भवन के उद्घाटन के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद महिलाओं की साक्षरता कापी कम थी थी, लेकिन आज परिस्थितियां बदली हैं। महिलाएं पुरुषों के साथ साक्षरता और अन्य क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहीं हैं। कहा ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संचालन में भी महिलाएं पुरुषों से कहीं आगे हैं। महिलाएं आईएएस-आईपीएस बन रहीं हैं। वे पायलट बनीं और अब सेना के युद्धक विमान भी चलाने के लिए उन्हें लेने की तैयारी हो रही है।
कहा कि संसद में महिलाओं को आरक्षण देने पर चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन ऐसा दिन आने वाला है, जब वे अपनी मेहनत और लगन से मनचाहा मुकाम हासिल कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि यह विश्व शांति भवन विश्व में शांति का वाहक बनेगा। किंतु शांति एक से नहीं आएगी।
जन-जन को इसके लिए सोचना पड़ेगा। संकल्प लेना होगा, तब हमारा चरित्र निर्माण होगा, जो सुख शांति का प्रतीक बनेगा। राज्यपाल ने कहा कि सोए रहने से, बैठे रहने से अथवा खड़े रहने से किस्मत नहीं बदलती।
किस्मत हमेशा चलते रहने से बदलती है। कहा कि मैं स्वयं को भाग्यशाली समझता हूं कि आज भदोही कालीन नगरी में विश्व शांति भवन का शुभारंभ करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
विश्व शांति भवन के उद्घाटन के मौके पर स्कूली बच्चों ने दी प्रस्तुति
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विश्व शांति भवन के विशाल सभागार में राज्यपाल ने महिलाओं की भागीदारी देख कर कहा कि वास्तव में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे जा रही हैं। बताया कि प्रदेश के 29 विश्वविद्यालयों के वे कुलाधिपति हैं। सभी में प्रत्येक वर्ष दीक्षांत समारोहों में जाते हैं।
वहां प्रमाण पत्र और मेडल प्राप्त करने में बालिकाएं बालकों से पीछे नहीं हैं। हाल ही में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में 77 प्रतिशत लड़कियों ने गोल्ड मेडल हासिल किया।
इतना ही नहीं 60 के दशक में जहां कक्षाओं में डेढ़ सौ बालकों में बमुश्किल पांच बालिकाएं होती थीं, वहीं अब कक्षाओं में बालिकाओं की संख्या 45 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
राज्यपाल दिन में 11.15 बजे विश्व शांति भवन पहुंचे। मुख्य द्वार से प्रवेश करने के उन्होंने वहां लगे शिव ध्वज फहराया, जिससे पुष्प वर्षा हुई। इसके बाद और आगे बढ़ने पर मुख्य भवन के द्वार पर बंधे रिबन काटकर भवन का उद्घाटन किया। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों के बीच भवन के मुख्य सभागार में पहुंचे, जहां उनका संबोधन होना था।