ठुमरी सामग्री गिरिजा देवी का गुरुवार को मणिकर्णिका घाट राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार में राज्यपाल रामनाइक के शामिल होने की उम्मीद है। राजभवन की ओर से बुधवार को अंतिम संस्कार के संबंध में जिला प्रशासन से जानकारी ली गई।
दिन में साढ़े ग्यारह बजे कोलकाता से जेट की फ्लाइट से गिरिजा देवी का शव कोलकाता से बाबतपुर एयरपोर्ट लाया जाएगा। बाबतपुर से गिरिजा देवी के कॉटन मिल स्थित आवास पर शव करीब दो घंटे तक जनता दर्शन के लिए रखा जाएगा।
यहां फूलों से सजे वाहन पर अंतिम यात्रा निकलेगी। साढ़े तीन बजे तक शव यात्रा के मणिकर्णिका घाट पर पहुंचने की उम्मीद है। गिरिजा देवी के भतीजे प्रकाश ने अपने पुत्र के साथ बुधवार को डीएम योगेश्वर राम मिश्र से मुलाकात की।
डीएम से अंतिम संस्कार के संबंध में वार्ता हुई। डीएम ने बताया कि प्रशासन परिवार के लोगों के संपर्क में है। वह स्वयं बाबतपुर एयरपोर्ट जाएंगे। मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
नियति ने तोड़ दिया ठुमरी की आखिरी प्रस्तुति का वादा
गिरिजा देवी
- फोटो : FILE PHOTO
ठुमरी गायिका पद्म विभूषण गिरिजा देवी के निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत को बहुत बड़ी क्षति हुई है। उनके निधन से बनारस की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक शोक की लहर है। लोग उन्हें याद कर रहे हैं, श्रद्धांजलि दे रहे हैं। ठुमरी गायक पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र ने कहा कि गिरिजा देवी के सुरों में दमकशी और बेजोड़ लालित्य का समागम था। वह बनारस घराने की प्रतिनिधि गायिका थीं।
सुरों का ऐसा साधक बार-बार नहीं पैदा होता है। उनकी जगह कोई नहीं भर पाएगा। गिरिजा देवी के निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत को बहुत बड़ी क्षति हुई है।पद्मभूषण पं. राजन मिश्र ने कहा कि शास्त्रीय संगीत के इस युग का आज सबसे दुखद दिन है। गिरिजा देवी जी सिर्फ एक गायिका ही नहीं थी, उन्होंने बनारसी ठुमरी को पूरे विश्व में एक अलग पहचान दिलाकर बनारस घराने का गौरव बढ़ाया था।
वह प्रेम की प्रतिमूर्ति थी, उन्होंने किसी से कोई अपेक्षा नहीं की बल्कि सबको अपने संगीत का ज्ञान बांटा। पद्मभूषण पं. साजन मिश्र ने कहा कि वे हिंदुस्तान के संगीत की शान थीं और उनका असमय चला जाना असहनीय है। वह हिंदुस्तान की ठुमरी की मल्लिका थीं।
गिरिजा देवी जैसी कोई गायिका ना थी, ना है और ना होगी। उनके निधन से गुरु-शिष्य परंपरा की कड़ी को बड़ा तगड़ा झटका लगा है। ठुमरी गायिका पद्मश्री सोमा घोष ने कहा कि अप्पा जी बनारस घराने की गायकी की तपस्या की प्रतिमूर्ति थीं।
गायकी उनकी साधना थी और सांस को बांधने का उनके अंदर जो दम था वह बेजोड़ था। उन्होंने कई बार कहा था कि सोमा मैं तुमसे कुछ भी नहीं लूंगी, तुम सिर्फ मेरे पास आ जाओ। उन्होंने जितना प्यार दिया उतना संगीत जगत में किसी से नहीं मिला।
अप्पा जी के निधन से काशी में दौड़ी शोक की लहर
गिरीजा देवी
ठुमरी गायक पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र ने कहा कि गिरिजा देवी के सुरों में दमकशी और बेजोड़ लालित्य का समागम था। वह बनारस घराने की प्रतिनिधि गायिका थीं। सुरों का ऐसा साधक बार-बार नहीं पैदा होता है। उनकी जगह कोई नहीं भर पाएगा।
गिरिजा देवी के निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत को बहुत बड़ी क्षति हुई है।पद्मभूषण पं. राजन मिश्र ने कहा कि शास्त्रीय संगीत के इस युग का आज सबसे दुखद दिन है। गिरिजा देवी जी सिर्फ एक गायिका ही नहीं थी, उन्होंने बनारसी ठुमरी को पूरे विश्व में एक अलग पहचान दिलाकर बनारस घराने का गौरव बढ़ाया था। वह प्रेम की प्रतिमूर्ति थी, उन्होंने किसी से कोई अपेक्षा नहीं की बल्कि सबको अपने संगीत का ज्ञान बांटा।
पद्मभूषण पं. साजन मिश्र ने कहा कि वे हिंदुस्तान के संगीत की शान थीं और उनका असमय चला जाना असहनीय है। वह हिंदुस्तान की ठुमरी की मल्लिका थीं। गिरिजा देवी जैसी कोई गायिका ना थी, ना है और ना होगी। उनके निधन से गुरु-शिष्य परंपरा की कड़ी को बड़ा तगड़ा झटका लगा है।
ठुमरी गायिका पद्मश्री सोमा घोष ने कहा कि अप्पा जी बनारस घराने की गायकी की तपस्या की प्रतिमूर्ति थीं। गायकी उनकी साधना थी और सांस को बांधने का उनके अंदर जो दम था वह बेजोड़ था। उन्होंने कई बार कहा था कि सोमा मैं तुमसे कुछ भी नहीं लूंगी, तुम सिर्फ मेरे पास आ जाओ। उन्होंने जितना प्यार दिया उतना संगीत जगत में किसी से नहीं मिला।