शनि ने पूछताछ में बताया कि इसी दौरान मेरा एक साथी थाना लंका के किसी मामले में जेल चला गया, जिस कारण चोरी के आभूषण का पैसा हम लोग आपस में बांट नहीं पाए थे। इंस्पेक्टर राजू सिंह ने बताया कि मोहनिया स्थित ज्वेलर्स की दुकान पर सराफ से पूछताछ की गई। दुकान पर लगे सीसीटीवी फुटेज को देखा गया। ज्वेलर ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि एक परिचित ने अपने साथियों के साथ खुद का आभूषण बताकर विश्वास में लेकर बेच दिया। पुलिस ने सराफ से आभूषण बरामद कर लिया। आरोपी और उसके साथी मोहल्लों में रेकी करते थे और फिर ताला बंद मकानों को चिह्नित कर रात में वारदात को अंजाम देते थे। चोरी के आभूषण को बिहार और दूसरे जिलों में जाकर बेचते थे। गिरफ्तारी टीम में एसआई अमीर बहादुर सिंह, एसआई सुशील कुमार सिंह, एसआई पवन कुमार, एसआई दिनेश सिंह आदि शामिल रहे।
एडीसीपी नीतू के अनुसार, पूछताछ में आरोपी शनि ने बताया कि घटना की रात वह अपने दो साथियों को लेकर स्कूटी से परमानंदपुर गांव में एक घर का ताला तोड़ने का प्रयास कर रहा था, तभी एक महिला के शोर मचाने पर वे भाग गए। इसके बाद गोविंदपुर में ताला लगा एक मकान दिखाई दिया, जिसकी बाउंड्री फांदकर तीनों अंदर गए और घर के पहले तल पर स्थित कमरे का ताला तोड़कर अलग-अलग कमरों में रखी अलमारियों को तोड़ दिया। उसमें रखे सोने-चांदी के आभूषण व एक लाख रुपये नकदी चोरी करने के बाद वे लंका के नगवां चले गए थे, जहां मेरे एक साथी का भाई व मेरा सगा साला आया। हमने देखा कि चोरी किए गए आभूषण काफी अधिक मात्रा में हैं। एक लाख रुपये नकदी आपस में बांट लिया और आभूषण अधिक होने के कारण तय किया कि इसे शहर से बाहर इकट्ठा बेचेंगे। लंका निवासी सगे साले को सभी आभूषण बेचने के लिए दे दिया। 24 मार्च को परिचित एक प्रॉपर्टी डीलर मेरे साथियों और मेरे साले को अपने जान-पहचान के सराफा व्यवसायी, जिनकी मोहनिया में आभूषण की दुकान है, वहां ले गया और चोरी के आभूषण 17 लाख रुपये में बेच दी गई।