भौतिक विज्ञान से स्नातक और इंजीनियरिंग कर चुके युवाओं के लिए पैकजिंग सेक्टर में असीम संभावनाएं हैं। वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्र को 30 हजार पैकेजिंग विशेषज्ञों की आवश्यकता है लेकिन मात्र चार सौ विशेषज्ञ ही इस क्षेत्र में हैं। ये बातें भारतीय पैकेजिंग संस्थान के निदेशक डॉ. एनसी साहा ने कही।
देश के एकमात्र पैकेजिंग संस्थान के निदेशक डॉ. साहा शुक्रवार को कैंटोंमेंट स्थित मदिन होटल में भारतीय पैकेजिंग संस्थान की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
ज्वाइंट डॉयरेक्टर तनवीर आलम ने एक सवाल के जवाब में बताया कि वाराणसी में फिलहाल अभी ऐसा संस्थान खोलने की कोई योजना नहीं है। देश में छह स्थानों पर पैकेजिंग संस्थान है और जल्द ही अहमदाबाद, बंगलूरू और गुवाहाटी में भी संस्थान की स्थापना की जाएगी।
कहा कि बड़ी कंपनियां ही बार कोड का इस्तेमाल करती हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को भी अपने उत्पादों पर बार कोड का इस्तेमाल करना चाहिए। जैसे बनारसी आम पर बार कोड का इस्तेमाल होगा तो सुदूर बैठा विक्रेता और उपभोक्ता को पता चल जाएगा कि बनारसी आम के नाम पर उससे धोखाधड़ी नहीं हुई है।
इससे कालाबाजारी व जमाखोरी पर रोक लगेगी। उद्यमियों के लिए जरूरी है कि वह फूड प्रोसेसिंग में पैकेजिंग का महत्व, फूड पैकेजिंग में प्रिंटिंग की भूमिका तथा खाद्य उत्पादन के लिए सुरक्षित जीवन का महत्व समझें।
कार्यक्रम में भारतीय औद्योगिक संघ के मंडलाध्यक्ष रमेश कुमार चौधरी ने कहा कि निश्चित ही पैकेजिंग उद्योग में असीम संभावना हैं। इसमें रोजगार का सृजन है, वहीं उद्यमिता का विकास है।