प्लांट का निर्माण अगले 25 वर्षों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन शहर से 600 टन कचरा निकलता है। शहर विस्तार के बाद करीब 800 टन कचरा निकासी का अनुमान है। इसलिए प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 800 टन से अधिक कचरा प्रसंस्करण की होगी।
निर्माण करने वाली कंपनी दो साल तक इसका संचालन करने के बाद नगर निगम को सौंपेगी। नगर निगम अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने कहा कि कचरे से कोयला बनाने के प्लांट की टेंडर आदि प्रक्रिया पूरी करा ली गई है। प्लांट के शिलान्यास की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल एक साल में प्लांट को संचालित करने की योजना है।
एनटीपीसी के दादरी में इसका डेमो और टारफेक्शन प्लांट स्थापित किया गया है। इसमें बताया गया है कि यह किस तरह पर्यावरण संरक्षण के साथ संचालित किया जाएगा। गंधहीन इस प्लांट में उत्सर्जन और शोर सीमा मानदंडों के अनुरूप होगी। हानिकारक पदार्थों के निर्वहन को रोकने के लिए कचरा लीचेट उपचार प्रणाली (जमीन में गड्ढा खोदकर निस्तारण करने की विधि) से गुजरेगा। स्वचालित मशीनों के जरिए इस प्लांट का संचालन किया जाएगा।
प्लांट की योजना के अनुसार एक किलोग्राम कोयला बनाने में छह रुपये का खर्च आएगा। जबकि बाजार में कोयले की कीमत कई गुना ज्यादा है। इस प्लांट के संचालन के बाद न केवल शहर में बढ़ रहे कचरे के ढेर से निजात मिलेगी, बल्कि इसका उपयोग भी किया जा सकेगा।